इंदौर में 28 साल के राहुल बगानी अपनी मृत्यु के बाद भी अमर हो गए। हादसे में जान गंवाने के बाद उनके माता-पिता और परिजन ने उनकी आंखें दान की हैं और अब वे उन आंखों से दुनिया को देखते रहेंगे। युवावस्था पुत्र के जाने के बाद उसके नेत्रदान करने का साहसिक कदम उठाने वाले माता-पिता की आज हर जगह चर्चा हो रही है। राहुल अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे, उनकी दो बहनें हैं जिनकी एक महीने पहले ही शादी हुई थी। दोनों ही बहनों की पिछले ही महीने इंदौर और मुंबई में शादी हुई है।
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एक्सीडेंट में गई जान
राहुल इंदौर के रावजी बाजार में दुकान चलाते थे। रावजी बाजार पुलिस के मुताबिक घटना शनिवार की है। राहुल (28) पुत्र हरीख बगानी लोहा मंडी ब्रिज पर शाम को लगभग साढे छह बजे आ रहे थे। वह ट्रांसपोर्ट से बिल्टी लेकर आ रहे थे तभी एक लोडिंग गाड़ी ने टक्कर मार दी। राहुल की एक्टिवा सड़क पर गिर गई। लोडिंग गाड़ी का पहिया उनके ऊपर से चढ़ गया था। इस दौरान राहुल की मौके पर मौत हो गई। लोड़िंग वाहन और एक्टिवा को थाने में जब्त किया गया है। राहुल के शव को पोस्टमार्टम के लिए एमवाय भेजा गया।
देर रात दान हुई आंखें
राहुल अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। राहुल अपने माता-पिता और दादा-दादी के साथ रहते थे। उनके परिवार के लोग मुस्कान फांउडेशन ग्रुप से जुड़े हुए हैं। यह ग्रुप अंगदान पर काम करता है। राहुल के जाने पर उनके रिश्तेदार जीतू बगानी ने रात में परिवार से बात की। इसके बाद राहुल की आंखें दान करने का फैसला किया गया। रात में डॉक्टरों की टीम को भेजकर उनकी आंखें दान करवाईं गईं।