बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने इंदौर निवासी आलोक शारदा सहित अन्य आरोपियों की 18 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की हैं। आईडीबीआई बैंक और एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी, मेसर्स किसान धन एग्री फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में यह कार्रवाई की गई। आरोपियों ने मानपुर स्थित मेसर्स शारदा वेयरहाउस में वेयरहाउस फाइनेंस स्कीम का गलत इस्तेमाल किया।
आरोपियों ने किसानों के कृषि उत्पादों को वेयरहाउस में जमा दिखाया और वेयरहाउस रसीदें जारी कीं। इन रसीदों के आधार पर सोयाबीन और चने की कुल 62,965 बोरियों के बदले 42 किसानों को लोन मंजूर किए गए। जांचकर्ताओं ने पाया कि गिरवी रखे गए सामान को बिना अनुमति के वेयरहाउस से हटा दिया गया और बेच दिया गया। लोन की सुविधा हासिल करने और उसे जारी रखने के लिए फर्जी वेयरहाउस रसीदें जारी की जाती रहीं, स्टॉक की उपलब्धता के बारे में गलत जानकारी दी गई और रिकॉर्ड को छिपाया गया।
इस मामले में कुर्की का आदेश जारी किया गया। ईडी की जांच भोपाल की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग द्वारा दर्ज दो एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। जुड़े बैंक धोखाधड़ी के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 13 करोड़ रुपए की कीमत वाली 18 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया गया है।
इस घोटाले के कारण आईडीबीआई बैंक को 14 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ और आरोपियों को उतनी ही राशि का लाभ हुआ। मेसर्स किसान धन एग्री फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने उसी वेयरहाउस में जमा बताए गए कृषि उत्पादों के बदले आलोक शारदा को 12 करोड़ रुपए का वेयरहाउस रिसीट फाइनेंस मंजूर किया था। बाद में जांच करने पर गिरवी रखे गए स्टॉक में भारी कमी पाई गई। वेयरहाउस में रखे कृषि उत्पाद भी बेच दिए गए।