पिछले पांच महीने में इंदौर में 54 ड्रग सप्लायर पकड़े, इनसे पुलिस ने 60 लाख की ड्रग बरामद की, डीसीपी क्राइम ब्रांच निमिष अग्रवाल ने बताया ड्रग के बढ़ते मामलों के बीच पुलिस की कैसी है तैयारियां
इंदौर में पिछले कुछ सालों में ड्रग का शिकार हो रहे युवाओं की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। लगातार स्वास्थ्य विभाग और पुलिस के पास इस तरह के मामले आ रहे हैं। जिम्मेदार भी मानने लगे हैं कि शहर में ड्रग के आने में तेजी से इजाफा हुआ है और इसी वजह से वे भी इससे निपटने के लिए नई रणनीतियां बना रहे हैं। इस विषय में अमर उजाला ने डीसीपी क्राइम ब्रांच निमिष अग्रवाल से बात की और जाना कि ड्रग के बढ़ते मामलों के बीच क्या है पुलिस की तैयारी...
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प्रश्नः शहर में आ रही ड्रग पर काबू पाने में सफलता क्यों नहीं मिल रही है?
उत्तरः शहर में ड्रग बहुत दूर से नहीं आ रही। आसपास के कई जिलों में अफीम की खेती होती है। ब्राउन शुगर भी वहीं से इंदौर में आती है। सीमावर्ती जिलों से ड्रग आने की वजह से इस पर पूरी तरह से नियंत्रण पाने में समय लग रहा है। दूर के जिलों से कुछ भी आने में कई चेकिंग पाइंट से गुजरना होता है इसलिए यह संभव नहीं होता। जो ड्रग आसपास ही बनाई जा सकती है वही आ रही है। पुलिस की सख्ती के बाद देश के अन्य कोनों से आने वाली ड्रग का आना लगभग बंद हो गया है।
प्रश्नः पुलिस ने ड्रग पर रोकथाम के लिए क्या कार्रवाई की है?
उत्तरः इंदौर में ड्रग का प्रकोप बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इसी वजह से पुलिस ने अपनी कार्रवाई बहुत तेज की है। पिछले पांच महीने में ही हमने ड्रग से जुड़े 54 लोगों को पकड़ा है। इनसे हमें 60 लाख की ड्रग बरामद हुई है।
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प्रश्नः शहर में पढ़ने आ रहे युवा लगातार इसका शिकार हो रहे हैं?
उत्तरः पैरेंट्स और बच्चों को खुद भी इसके लिए जागरूक होना होगा। हम भी अपने स्तर पर युवाओं के बीच समय समय पर जागरूकता अभियान चलाते हैं। दोस्तों के बीच कुछ समय की मौज मस्ती के लिए लिया गया नशा पूरा जीवन बर्बाद कर सकता है।