धार भोजशाला को लेकर हाईकोर्ट ने 15 मई को फैसला सुनाया था। कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट के आधार पर भोजशाला को हिंदू मंदिर माना था और हिंदुओं को साल के 365 दिन पूजा का अधिकार दिया था। हाईकोर्ट के इस फैसले को तीन पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला से जुड़ी तीनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई शुरू की है।
भोजशाला को लेकर हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश सरकार ने यहां सरस्वती लोक बनाने का निर्णय लिया है। कैबिनेट बैठक में भी इसे मंजूरी दी जा चुकी है। हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए मुस्लिम पक्ष ने विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है। शहर काजी, कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी और इसके बाद वक्फ बोर्ड की ओर से जिब्रान अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं।
उधर हिंदू पक्ष ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखने की तैयारी की है। इसके लिए पहले ही कैविएट दायर की जा चुकी है, ताकि हिंदू पक्ष को सुने बिना कोई स्थगन आदेश (स्टे) जारी न किया जा सके।
सुनवाई के दौरान धार के याचिकाकर्ता आशीष गोयल और उनके वकील विनय जोशी कोर्ट में मौजूद रहे। गोयल ने कहा कि भोजशाला हिंदू मंदिर थी। इसका उल्लेख एएसआई की करीब 2 हजार पेज की सर्वे रिपोर्ट के साथ ही प्राचीन दस्तावेजों में भी मिलता है। उन्होंने कहा कि हिंदू पक्ष भोजशाला में मां वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित करेगा, जो वर्तमान में लंदन के म्यूजियम में रखी हुई है।