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Dhar Bhojshala: भोजशाला मामले में एएसआई ने कहा -वर्तमान ढांचा पहले के मंदिरों के हिस्सों से बनाया गया था

Wed, 06 May 2026 06:01 AM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

धार भोजशाला मामले में जारी सुनवाई में हाईकोर्ट ने एएसआई को अपना पक्ष रखने को मौका दिया। एएसआई ने 98 दिनों तक सर्वे किया था। एएसआई के वकील ने कहा कि वर्तमान ढांचा पहले के मंदिरों के हिस्सों से बनाया गया था।
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भोजशाला परिसर फाइल फोटो
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विस्तार
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भोजशाला मंदिर मामले की सुनवाई के दौरान केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने  हाईकोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखा।  भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने कोर्ट को  बताया कि इस स्थल पर परमार राजाओं के शासनकाल का एक विशाल ढांचा मौजूद था और वर्तमान का मौजूद निर्माण मंदिरों के अवशेषों से बना है।एएसआई ने यह दावा अपने 98 दिन तक चले वैज्ञानिक सर्वे और दो हजार से अधिक पन्नों की रिपोर्ट के आधार पर किया।
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इंदौर खंडपीठ के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी के समक्ष चल रही सुनवाई के दौरान एएसआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने दो वर्ष पहले परिसर में कराए गए वैज्ञानिक सर्वे का विस्तृत विवरण रखा।


उन्होंने एएसआई की दो हजार से अधिक पन्नों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि प्राप्त स्थापत्य अवशेष, मूर्तियों के खंड, साहित्यिक ग्रंथों वाले बड़े शिलालेख, स्तंभों पर नागकर्णिका अभिलेख आदि इस बात का संकेत देते हैं कि इस स्थल पर साहित्यिक और शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़ा एक बड़ा ढांचा मौजूद था। वैज्ञानिक जांच और उत्खनन में मिले पुरातात्विक अवशेषों के आधार पर इस पूर्ववर्ती संरचना को परमार काल का माना जा सकता है।
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जैन ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह भी कहा कि वैज्ञानिक जांच, सर्वेक्षण, पुरातात्विक उत्खनन, प्राप्त अवशेषों के अध्ययन और  मूर्तिकला व शिलालेखों के विश्लेषण के आधार पर यह कहा जा सकता है कि वर्तमान ढांचा पहले के मंदिरों के हिस्सों से बनाया गया था।रिपोर्ट का सार प्रस्तुत करते हुए उन्होंने अदालत को बताया कि पुरातात्विक अध्ययन से यह भी सामने आया है कि कई स्थापत्य हिस्से, जैसे स्तंभ और बीम, मूल रूप से मंदिर संरचनाओं का हिस्सा थे, जिन्हें बाद में मस्जिद में उपयोग किया गया।


उन्होंने तर्क दिया कि इस परिवर्तन के प्रमाण के तौर पर संस्कृत और प्राकृत भाषा के ऐसे शिलालेख मिले हैं जिन्हें नुकसान पहुंचाया गया या छिपाया गया था। साथ ही देवी-देवताओं और पशुओं की मूर्तियां भी क्षतिग्रस्त या विकृत अवस्था में मिलीं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सभी संस्कृत और प्राकृत शिलालेख अरबी और फारसी शिलालेखों से पुराने हैं, जिससे संकेत मिलता है कि संस्कृत और प्राकृत का उपयोग करने वाले लोग पहले इस स्थान पर मौजूद थे।मुस्लिम पक्ष की पहले की आपत्तियों के संदर्भ में खंडपीठ ने पूछा कि वर्षों में दायर मामलों में विवादित परिसर की स्थिति को लेकर एएसआई के जवाबों में कुछ विरोधाभास क्यों दिखाई दिए।


इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि पहले हुए अध्ययनों में केवल अधिकारी शामिल थे, जबकि वर्तमान सर्वे में वैज्ञानिकों को शामिल किया गया और ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार  जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया। भोजशाला मामले की अगली सुनवाई 6 मई को होगी।
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