इंदौर के रानीपुरा में जर्जर तीन मंजिला मकान गिर गया
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इंदौर में खतरनाक मकानों के गिरने का सिलसिला जारी है। सोमवार को रानीपुरा क्षेत्र में गिरे मकान के पहले इसी इलाके के तोड़ा क्षेत्र में अगस्त माह में भी एक मकान भरभराकर गिर गया था। हालांकि उस मकान में कोई नहीं था, इसलिए कोई हताहत नहीं हुआ था। बारिश के पहले निगम ने 102 जर्जर मकानों की सूची तैयार की थी, इनमें से कुछ एक पर कार्रवाई की गई। लेकिन ज्यादातर मकानों पर कार्रवाई फाइलों में दबी रह गई और अब फिर रानीपुरा में बड़ा हादसा हो गया।
20 अगस्त को तोड़ा क्षेत्र में जो मकान गिरा उसके अंदर न तो मकान के भीतर कोई था और न ही आसपास लोग खड़े थे। इस कारण कोई जनहानि नहीं हुई। पास के खाली प्लॉट पर खुदाई की जा रही थी। इस कारण पास का मकान गिर पड़ा था। तीन साल पहले जवाहर मार्ग से चंद्रभागा जूनी इंदौर की रिवर साइड रोड बनाने के लिए 50 से ज्यादा मकानों के आगे के हिस्से हटाए गए थे, लेकिन बचे हिस्से रहने लायक नहीं बचे थे। पिछले दिनों नगर निगम ने 18 आधे मकानों को भी तोड़ा था, ताकि हादसा न हो।
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तोड़ा में गिरा यह मकान सैय्याद अखलाक का था। इसका कुछ हिस्सा सड़क की चौड़ाई की जद में आने के कारण तोड़ा गया था, लेकिन मकान मालिक ने बचे हिस्से की मरम्मत नहीं की थी। मकान खतरनाक स्थिति में होने के कारण चार माह पहले परिवार के लोगों मकान खाली कर दूसरी जगह रहने चले गए थे। तीन मंजिला मकान पिलर धंसने के कारण गिरा। यह मकान 40 साल से ज्यादा पुराना था और वर्षों तक कई किराएदार भी रहते थे।
बिजासन रोड पर तोड़े थे मकान
नगर निगम हर साल बारिश के पहले जर्जर व खतरनाक मकानों की सूची तैयार करता है। इस बार भी सूची बनाई गई थी। इसमें 102 मकान शामिल थे। इनमें से कुछेक मकान तोड़े गए, लेकिन बाकी को उसी हालत में छोड़ दिया गया। मई में निगम की टीम ने एरोड्रम रोड पर एक जर्जर मकान गिराया था। यह कार्रवाई तत्कालीन नगर निगम आयुक्त शिवम वर्मा के निर्देश पर की गई थी। जर्जर व खतरनाक मकानों के मालिकों को नोटिस भी जारी किए गए थे।
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