मध्यप्रदेश के इंदौर में हो रही खो-खो टीम के जूनियर वर्ग की प्रक्रिया में कई खेल प्रतिभाओं को मौका नहीं मिल पा रहा है। चयनकर्ता खुद स्वीकार रहे हैं कि खेल विभाग द्वारा कम बजट होने के कारण चयन प्रक्रिया में हर जिले से तीन खिलाड़ियों को ही मौका दिया जा रहा है।
जनवरी महीने में 'खेलो इंडिया खेलो' में खो-खो खेल की मेजबानी का मौका प्रदेश के जबलपुर को मिला है। अन्य प्रदेशों नेशनल प्रतियोगिता में जो खो-खो की आठ टीमें होती हैं, उनकी इस खेलो इंडिया मे भिड़ंत होगी। प्रदेश से मध्यप्रदेश और मध्यभारत नाम से दो टीमें नेशनल प्रतियोगिता में भाग लेती हैं। लेकिन मेजबानी के कारण प्रदेश की एक ही टीम को खेलो इंडिया मे खेलने का मौका दिया जा रहा है।
प्रदेश टीम की चयन प्रक्रिया में हर जिले से 15 खिलाड़ियों की टीम को खेलने के लिए बुलाया जाता है। इस दो दिवसीय प्रतियोगिता में सभी जिले की टीमों को ग्रुप में विभाजित कर नाकआउट पद्धति के अनुसार फाइनल मैच तक कराए जाते हैं और बेहतर 15 खिलाड़ी परफॉर्मेंस के आधार पर चयन किए जाते हैं, लेकिन खो-खो संघ सचिव ने इन सब नियमों को दरकिनार कर कुछ जिलों से सिर्फ तीन-तीन खिलाड़ियों को बुलाकर ही खेलो इंडिया खेलो में खेलने वाली प्रदेश टीम का चयन कर लिया।
इस बारे में जब मध्यप्रदेश खो-खो संघ सचिव संजय यादव से बात की तो उन्होंने बजट कम होने का हवाला देते हुए इस चयन प्रक्रिया को सही बताया। उन्होंने कहा कि हर जिले से आने वाली टीमों के आने-जाने,रुकने व खाने के खर्चे का बजट नहीं है। आपको बता दें कि अगले महीने इंदौर में खेलो इंडिया खेलो स्पर्धा शुरू होगी। प्रदेश के कई शहरों में आयोजन होंगे।