इंदौर में मरीज का इलाज करती टीम।
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
ब्लड कैंसर के उपचार के लिए की जाने वाली कार टी सेल थेरेपी अब इंदौर में भी उपलब्ध हो गई है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. संजय दीक्षित ने बताया कि कैंसर के उपचार में यह सबसे उन्नत प्रक्रियाओं में से एक है। अमेरिका, यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूके जैसे देशों में इस थेरेपी की शुरुआत कुछ साल पहले हो चुकी है जबकि भारत में इस थेरेपी को आईआईटी मुंबई और टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के संयुक्त सहयोग से विकसित किया गया है।
2021 में हुई पहली थेरेपी
पहली थेरेपी 2021 में की गई थी। भारत में राष्ट्रपति ने इस प्रक्रिया को अप्रैल 2024 में लागू करने के लिए समर्पित किया है। अमेरिका में इस उपचार प्रक्रिया की लागत लगभग 4 करोड़ रुपये है। जबकि मध्य भारत में इस इलाज की कीमत इस लागत का दसवां हिस्सा है। दीक्षित ने बताया कि एमवाय यह सुविधा देने वाला यह देश का पहला शासकीय अस्पताल है और यह एक मील का पत्थरसाबित होगा।
कैसे काम करती है यह थेरेपी
काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर्स (सीएआर) आनुवंशिक रूप से एन्कोडेड कृत्रिम संलयन अणु हैं जो चयनित कोशिका सतह लक्ष्य के विरुद्ध विशेष रूप से परिधीय रक्त पॉलीक्लोनल टी-कोशिकाओं को पुन: प्रोग्राम कर सकते हैं। सीएआर आनुवांशिक रूप से इंजीनियर किए गए रिसेप्टर्स हैं जो टी सेल सिग्नलिंग डोमेन के साथ ट्यूमर लक्ष्यीकरण एंटीबॉडी से विशिष्ट बाइंडिंग डोमेन को जोड़ते हैं ताकि विशेष रूप से लक्षित एंटीबॉडी को टी सेल सक्रियण को पुनर्निर्देशित करने की अनुमति मिल सके। कार टी सेल थेरेपी, ल्यूकेमिया/लिम्फोमा (रक्त कैंसर) के इलाज के लिए सबसे अत्याधुनिक उपचारों में से एक, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन और बोन मैरो ट्रांसप्लांट विभाग, एमजीएम मेडिकल कॉलेज इंदौर द्वारा शुरू की गई है। इसमें बी-सेल एएलएल (कैंसर) से पीड़ित एक मरीज की श्वेत रक्त कोशिकाओं को एफेरेसिस मशीन की मदद से एकत्र किया गया, आनुवंशिक संशोधन किया गया और फिर प्रसंस्करण के 20 दिन बाद संशोधित सीएआर टी कोशिकाओं को रोगी में प्रत्यारोपित किया जाएगा। ये संशोधित कोशिकाएं रोगी में ट्यूमर कोशिकाओं को मार देंगी।