फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Indore: सामान्य बच्चों के साथ दृष्टिहीन युवती ने की पढ़ाई, परीक्षा पास कर पाई सरकारी नौकरी

Sat, 15 Jul 2023 09:21 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

बड़वानी की निर्मला भी दृष्टिहीन है। इंदौर आकर उसने बीए की परीक्षा पास की। लक्ष्मी अेाल्ड जीडीसी में पढ़ती थी। उसने ग्रेजुएशन सामान्य विद्यार्थियों के साथ किया। अध्यापक जो पढ़ाते थे, लक्ष्मी उन्हें मोबाइल में रिकार्ड कर लेती थी।
विज्ञापन
दृष्टिहीन सुशीला अपने परिवार के साथ - फोटो : amar ujala digital
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

यदि कुछ करने का जज्बा हो तो कमजोरी भी ताकत बन जाती है। अभाव में रहने के बावजूद तीन दृष्टिहीन युवतियों ने मेहनत की और सरकारी नौकरी हासिल कर अपने परिवार को खुशियों की सौगात दी। अलग-अलग गांवों से आकर इंदौर मेें पढ़ाई करने वाली इन युवतियों ने हाल ही मेें प्रतियोगी परीक्षा पास कर रेलवे और बैक में सरकारी नौकरी पाई है। इन युवतियों को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारियों में मदद करने वाले शिक्षक राजू सैनी कहते है कि अथक मेहनत कर इन युवतियों ने सफलता पाई है।

रेलवे के साथ बैंक मेें हुआ सिलेक्शन

देवास के पास के एक गांव में रहने वाली ममता ठाकुर 100 प्रतिशत दृष्टिबाधित है। उसके माता-पिता मजदूरी करते है। ममता परिवार पर निर्भर रहने के बजाए उनका सहारा बनना चाहती थी। मां तो उसे पढ़ाना नहीं चाहती थी, लेकिन ममता की जिद के कारण उसको देवास केे होस्टल मेें रखा गया। यहां उसने 12 वीं तक पढ़ाई की। इसके बीए और एमए करने के लिए वह इंदौर आ गई और महेश दृष्टिहीन छात्रावास में रहने लगी।

विज्ञापन


मतता कहती है कि हर सप्ताह मां मजदूरी में जो पैसा इकट्ठा करती थी, वह मुझे इंदौर देेने आती थी। चार माह पहले मैने रेलवे और बैंक की परीक्षा दी, मेरा दोनो जगह सिलेक्शन हो गया। मैने सरकारी बैैंक को चुना। पिछले महीने ही मैने ज्वाईनिंग दी। पहली सैलरी मुझे मिली तो उसे मैैने अपनी मां केे हाथों में रखी।

अध्यापकों की बातें रिकार्ड कर पढ़ती थी लक्ष्मी

बड़वानी की निर्मला सोलंकी भी दृष्टिहीन है। इंदौर आकर उसने बीए की परीक्षा पास की। निर्मला अेाल्ड जीडीसी में पढ़ती थी। उसने ग्रेजुएशन सामान्य विद्यार्थियों के साथ किया। अध्यापक जो पढ़ाते थे, वहचउन्हें मोबाइल में रिकार्ड कर लेती थी और उन्हें बार-बार सुनकर याद करती थी। परीक्षा में हेल्पर की मदद से वह उत्तर पुस्तिका में बोल उत्तर लिखवाती थी। निर्मला ने भी पिछले दिनों बैंक मेें क्लर्क की परीक्षा दी। परीक्षा पास करने और साक्षात्कार के बाद उसकी नौकरी रतलाम की सेंट्रल बैंक आफ इंडिया की शाखा में लगी है।

15 साल की मेहनत रंग लाई

45 वर्षीय सुशीला सावले इंदौर में रहती है। शादी के बाद उन्होंने इंदौर से ग्रेजुएशन किया और प्रतियोगी परीक्षाएं दी। 15 साल के बाद उन्होंनेे रेलवे में क्लर्क की परीक्षा पास की और झारखंड के चंद्रपुर स्टेशन में नौकरी लगी। पति संतोष कहते है कि अब हम अपने एकलौते बेटे की देखभाल अच्छी तरह कर सकेंगे। कम आय होने से हमने काफी परेशानियां झेली। अब जिंदगी आसान हो जाएगी।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें