भोजशाला की खुदाई में मिली थी प्रतिमा...
साल 1875 में हुई खुदाई में वाग्देवी की प्रतिमा भोजशाला की खुदाई में मिली थी। बाद में अंग्रेज इस प्रतिमा को इग्लैंड लेकर चले गए थे। भोजशाला में हर साल वसंत पंचमी को पूजा होती है। कई बार संत समाज भी इस प्रतिमा को फिर भारत लाने की मांग कर चुका है, लेकिन इस दिशा में कभी ठोस प्रयास नहीं किए गए। भोजशाला में कई बार शुक्रवार को बसंत पंचमी आने के कारण तनाव पूर्ण स्थिति भी बन चुकी है। क्योंकि यहां मुस्लिम समाज नमाज के लोग नमाज भी पढ़ने आते हैं।
भोजशाला में मंगलवार को होती है पूजा, शुक्रवार को पढ़ी जाती है नमाज...
दोनों समुदायों के इस स्थान को लेकर अपने अपने दावे हैं। इस विवाद को आज तक सुलझाया नहीं जा सका है। भारत पुरातत्व विभाग यानी एएसआई की बरसों से जारी व्यवस्था के तहत हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार को भोजशाला में पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुस्लिमों को हर शुक्रवार को इस जगह पर नमाज अदा करने की इजाजत है।