फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bhagoriya 2025: लो आ गया भगोरिया, लोक संस्कृति,उल्लास में भीगे रहेंगे आदिवासी अंचल

Wed, 05 Mar 2025 08:25 AM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

समय के साथ आदिवासी संस्कृति के साथ आधुनिकता की झलक भी इस त्यौहार में शामिल हो चुकी है। सन ग्लासेस, ईयर फोन, सेल्फी भी मेलों में दिखाई देती है, लेकिन पारंपरिक गीत, पकवान और आदिवासी संस्कृति ने आज भी पुरानी परंपरा की खुशबू को ताजा कर रखा है।
विज्ञापन
भगोरिया मेला। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जाते हुई वसंत ऋतु की खुशनुमा बयार, खिलते फूल, हवा में इठलाते ताजा-ताजा पत्ते और मतवाला माहौल काफी होता है आदिवासी समाज के भगोरिया पर्व में चार चांद लगाने के लिए। होली के त्योहार के सात दिन पहले मनाए जाने वाले पर्व का समाज को बेसब्री से इंतजार है।

विज्ञापन


रोज-रोटी की तलाश में अपने गांव-फालियों से पलायन करने वाले परिवार लौट आते इस पर्व के बहाने अपनी मिट्टी की सौंदी महक और लोक संस्कृति की चमक दमक के लिए। आदिवासी अंचल में यह मेला 7 मार्च से लगना शुरू हो जाएगा। जगह-जगह भगोरिया हाट की तैयारियां हो चुकी है।

 

समय के साथ आदिवासी संस्कृति के साथ आधुनिकता की झलक भी इस त्यौहार में शामिल हो चुकी है। सन ग्लासेस, ईयर फोन, सेल्फी भी मेलों में दिखाई देती है, लेकिन पारंपरिक गीत, पकवान और आदिवासी संस्कृति ने आज भी पुरानी परंपरा की खुशबू को ताजा कर रखा है। भगोरिया मेल में आदिवासी अपने अंदाज में अपनी जिंदगी जीते है और फिर सालभर उनकी यादों का संजो कर रखते है। भगोरिया मध्य प्रदेश के झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन व जिलों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
 

राजा भोज के समय से शुरूआत

कहा जाता है कि भगोरिया की शुरुआत राजा भोज के समय से हुई। उस समय दो भील राजा कासूमार औऱ बालून ने अपनी राजधानी भगोर में मेले का आयोजन करना शुरू किया थी। जब इसकी ख्याती बढ़ने लगी तो फिर धीरे-धीरे आसपास के भील राजाओं ने भी मेले को अपने-अपने इलाकों में लगाना शुरू कर दिया और इसने एक परंपरा का रुप ले लिया।

विज्ञापन


यह भी कहा जाता है कि होली के पहले लगने वाले हाट में आदिवासी समाज जमकर रंग-अबीर खेलते है, गुलाल उड़ाते है। इसलिए इसे गुलालिया हाट कर जाता था, लेकिन बाद में व भगोरिया हाट कहलाने लगा। यह भी कहा जाता है कि इस हाट में आदिवासी युवक-युवतियां सज-संवर कर आते है और हाट में रिश्ते भी तय होते है।

 

भगोरिया को राजकीय उत्सव का दर्जा

मध्य प्रदेश सरकार ने भगोरिया को राजकीय उत्सव का दर्जा देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जनजातीय समाज के जितने भी त्यौहार है, प्रदेश सरकार उसे राजकीय स्तर पर मनाएगी।

 

कब कहां लगेगा भगोरिया

 

- 07 मार्च से 13 मार्च 2025

07 मार्च (शुक्रवार)

वालपुर, कठ्ठीवाड़ा, उदयगढ़ कदवाल, सेजावाडा, वडी

08 मार्च (शनिवार)

नानपुर, उमराली, कदवाल, बलेड़ी

09 मार्च (रविवार)

छकतला, कुलवट, सोरवा, आमखुट, झिरन, कनवाड़ा, अजन्दा

10 मार्च (सोमवार)

अलीराजपुर, आजाद नगर, बड़ागुड़ा, कुंड़वाट

11 मार्च (मंगलवार)

बखतगढ़, आम्बुआ, अंधरवाड़ा, अम्बाडबेरी

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें