निजी टैंकर संचालकों की मनमानी भी सामने आ रही है। पहले 500 रुपए में मिलने वाला पानी का टैंकर अब 700 से 1000 रुपए तक पहुंच गया है। वहीं, नर्मदा लाइन से पानी की सप्लाई भी घट गई है। पहले जहां नल एक घंटे तक चलते थे, अब सिर्फ 15 मिनट ही पानी मिल पा रहा है।
सुखलिया निवासी राम केवल यादव के अनुसार, क्षेत्र में जलस्तर तेजी से गिरा है और कई बोरिंग सूख चुके हैं। कई इलाकों में नर्मदा का पानी नहीं पहुंचता, जिससे लोग पूरी तरह टैंकरों पर निर्भर हैं।
परदेशीपुरा और आसपास के क्षेत्रों में हालात और भी खराब हैं। यहां के निवासी रमेश रावल बताते हैं कि लोग सुबह 4 बजे से ही साइकिल और ठेलों पर डिब्बे लादकर पानी की तलाश में निकल जाते हैं। पानी भरने में रोज 2 से 3 घंटे लग रहे हैं।
नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल के अनुसार, मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ गया है। जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन नहीं है, वहां नि:शुल्क टैंकरों की संख्या बढ़ाई जा रही है और अधिक प्रभावित इलाकों की मैपिंग की जा रही है। अवैध मोटर पंप लगाने वालों पर कार्रवाई भी जारी है।
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महापौर पुष्यमित्र भार्गव का कहना है कि जल संकट के समाधान के लिए विशेष टीम बनाई गई है और कंट्रोल रूम के जरिए शिकायतों का त्वरित निवारण किया जा रहा है। साथ ही ‘नर्मदा चतुर्थ चरण’ परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है।
वहीं, नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने इसे प्रशासनिक विफलता बताते हुए कहा कि अमृत योजना के करोड़ों रुपए का सही उपयोग नहीं हुआ। पर्यावरणविद् भालू मोंढे ने चेतावनी दी है कि यह केवल मौसमी संकट नहीं, बल्कि भविष्य में और गंभीर रूप ले सकता है। उन्होंने रेन वाटर हार्वेस्टिंग, जल स्रोतों के पुनरुद्धार और पाइपलाइन विस्तार पर जोर दिया है।