इंदौर के दीपक ढाकेता अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उन्होंने अपनी मौत से पहले तीन अलग अलग शहरों के चार लोगों को नई जिंदगी देकर वह एक मिसाल बन गए हैं। उनके शरीर के विभिन्न अंगों को तीन अलग शहरों के चार लोगों में ट्रांसप्लांट किया गया, जिससे उन्हें नया जीवन मिल सका।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार इंदौर के रहने वाले 18 वर्षीय दीपक ढाकेता अखबार बांटने का काम करते थे। कुछ दिन पहले एक सड़क हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
उनका शहर के श्री औरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में इलाज चल रहा था। दीपक की नाजुक हालत को देखते हुए अस्पताल के चिकित्सकों ने उनके परिजनों को इस बात के लिए राजी कर लिया था कि अगर उनकी मौत होती है तो उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंग जरूरतमंद लोगों को दान कर दिए जाएंगे।
गुरुवार को चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद शुरू हुआ वह मिशन जो अस्पताल के चिकित्सकों के लिए तो चुनौती था ही पुलिस और अन्य विभागों के लिए भी किसी मुश्किल टास्क से कम नहीं था।
दीपक की मौत के बाद उनके दिल, लीवर और दोनों किडनी को जरूरतमंद मरीजों में ट्रांसप्लांट किया जाना था, लेकिन दिक्कत ये थी कि किडनी के अलावा दिल
और लीवर को इंदौर से बाहर भेजना था।
किडनी इंदौर तो लीवर और दिल को दिल्ली भेजा गया
उनकी एक किडनी को अरविंदो हॉस्पिटल में ही मौजूद मरीज को तो दूसरी किड़नी को शहर के छोटराम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में भिजवाया जाना था। जबकि दिल और लीवर को दिल्ली भेजा जाना था।
इंदौर की ऑर्गन डोनेशन सोसायटी के सेक्रेटरी डा. संजय दीक्षित ने बताया कि दिल को गुडगांव के मेदांता मेडिसिटी में दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रही एक 48 वर्षीय महिला को ट्रांसप्लांट किया जाना था तो लीवर को दिल्ली के वसंत कुंज के आईएलबीएस हॉस्पिटल में भर्ती 55 वर्षीय व्यक्ति के शरीर में ट्रांसप्लांट करना था।
पुलिस और ट्रैफिक डिपार्टमेंट के अधिकारियों से बातचीत के बाद डॉक्टरों ने दीपक के अंगों को बाहर भिजवाने की तैयारी शुरू की। डा. दीक्षित ने बताया कि तीन अंगों को अस्पताल से बाहर सुरक्षित भेजना खासा चुनौतीपूर्ण था, इसके लिए तीन ग्रीन कॉरीडोर बनाए गए।
पहला कॉरीडोर अस्पताल से एयरपोर्ट तक बनाया गया जिसमें सुबह 11.23 पर दीपक के दिल और दूसरा कॉरीडोर 12.02 बजे बनाया गया जिससे उसके लीवर को एयरपोर्ट तक भेजा गया। तीसरा कॉरीडोर अस्पताल से छोटराम अस्पताल तक बनाया गया जिससे एक किडनी को वहां के लिए रवाना किया गया।
वहीं दोनों अंगों के दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने से पहले ही वहां तैयारियां शुरू हो गई। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के संयुक्त आयुक्त शरद अग्रवाल ने बताया कि हमें सुबह 11 बजे इसकी सूचना प्राप्त हुई जिसके बाद तुरंत वसंत विहार सर्किल में पुलिस टीम को तुरंत अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया गया, ताकि एंबुलेंस को पास होने में किसी तरह की दिक्कत न हो।
घंटों की दूरी मिनटों में तय की गई
उन्होंने बताया कि दिल को लेकर प्लेन दोपहर 1.15 पर इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर पहुंचा जहां से उसे तुरंत गुडगांव के मेदांता मेडिसिटी के लिए रवाना किया गया। 18 किलोमीटर के इस सफर को मात्र 16 मिनट में तय किया गया। जबकि लीवर एयरपोर्ट पर 1.58 पर पहुंचा जिसे आईएलबीएस के लिए रवाना कर दिया गया।
दिल्ली के भारी ट्रैफिक के बीच 11.4 किमी की दूरी मात्र 15 मिनट में पूरी की गई। इस दौरान दोनों रूट पर एंबुलेंस के लिए ट्रैफिक लाइट को ग्रीन कर दिया गया। पुलिस की एक टीम ने पूरे सफर की वीडियोग्राफी भी की।
मेदांता के सीनियर डॉक्टर ने बताया कि दिल को सफलतापूर्वक मरीज के शरीर में ट्रांसप्लांट कर दिया गया है, लेकिन अभी उसके सही से काम करने के बारे में कुछ समय बाद ही कहा जा सकता है।
वहीं आईएलबीएस के डॉक्टरों ने बताया कि जिस व्यक्ति को लीवर ट्रांसप्लांट किया गया है उसकी हालत काफी नाजुक थी, लेकिन किस्मत से उसे समय से लीवर मिल गया।