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इंदौर: समाज में सौहार्द्र एवं समरसता को बढ़ावा देते हुए मुफ्त एवं निष्पक्ष मध्यस्थता कराए जाने के उद्देश्य से प्रतिभागियों को दिलाई प्रतिज्ञा

Sun, 05 Dec 2021 06:24 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

सामुदायिक मध्यस्थता की परिकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से इंदौर में उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के तत्वावधान में सामुदायिक मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
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प्रतिभागियों को प्रतिज्ञा दिलवाई गई। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खण्डपीठ इंदौर के प्रशासनिक न्यायाधिपति सुजय पॉल एवं न्यायाधिपति विवेक रूसिया की सामुदायिक मध्यस्थता की परिकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के तत्वावधान में सामुदायिक मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रिंसिपल रजिस्ट्रार एवं सचिव बीके द्विवेदी ने समाज में सौहार्द्र एवं समरसता को बढ़ावा देते हुए नि:शुल्क एवं निष्पक्ष मध्यस्थता कराए जाने के उद्देश्य से सभी प्रतिभागियों को प्रतिज्ञा दिलवाकर कार्यक्रम का समापन किया।  
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कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनर डॉ. मोहम्मद शमीम एवं आरती शर्मा ने प्रतिभागियों को विषय-वस्तु से पुनरावलोकन करवाते हुए कृत्रिम अभ्यास के माध्यम से उनके कौशल का परीक्षण किया। प्रतिभागियों से कराए गएअभ्यास के आधार पर समझौता अनुबंध लेखन का अभ्यास करवाया गया, जिसमें प्रतिभागियों द्वारा अनुबंध की शर्तों का उल्लेख एक कुशल मध्यस्थ की तरह किया गया। सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मनीष श्रीवास्तव द्वारा प्रशिक्षण में भाग ले रहे प्रतिभागियों को अवगत कराया गया कि मध्यस्थता सफल होने पर मध्यस्थता अनुबंध को कार्यालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समक्ष आवेदन देकर स्थायी एवं निरंतर लोक अदालत के माध्यम से डिक्री की विधि मान्यता दिलाई जा सकती है।

प्रिंसिपल रजिस्ट्रार व सचिव बीके द्विवेदी ने कार्यक्रम के समापन उद्बोधन में प्रतिभागियों को यह संदेश दिया  कि प्रशिक्षण उपरांत सभी की महती जिम्मेदारी है कि समाज में उद्भूत हो रहे विवादों का 7 दिवसीय प्रशिक्षण में बताई गई मध्यस्थता तकनीकी कौशल का उपयोग करते हुए प्रारंभिक स्तर पर निराकरण करवाया जाए।  कार्यक्रम में मप्र उच्च न्यायालय खण्डपीठ इंदौर के स्टाफ के साथ-साथ बोहरा समुदाय, जैन समुदाय, वाल्मिकी समुदाय, ब्राह्मण समुदाय, वैश्य समुदाय, कोरी समुदाय, बैरवा समुदाय, नेमा समुदाय, पासी समुदाय, बंगाली समुदाय, गुजराती समुदाय, अग्रवाल समुदाय, मुस्लिम समुदाय, सिक्ख समुदाय, यादव समाज, अहिरवार समाज एवं गहोई वैश्य समुदाय के प्रबुद्धजन सम्मिलित हुए।
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