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इंदौर: कवि सत्तन ने कहा- हर दौर में इंदौर था, इंदौर है और इंदौर ही रहेगा, इसका नाम बदलने की कोशिश हुई तो किया जाएगा विरोध

Mon, 21 Feb 2022 01:13 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

इंदौर के नाम बदलने की कवायद के बीच अब विरोध के स्वर उठे हैं। प्रबुद्धजनों ने कहा है कि इंदौर का नाम बदले की सोच गलत है। कवि पं. सत्यनारायण सत्तन ने कहा है कि इंदौर का नाम बदलने की कोशिश हुई तो विरोध किया जाएगा। 
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बैठक में उपस्थित प्रबुद्धजनों ने रखी अपनी बात - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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बीते कुछ दिनों में चल रही इंदौर के नाम बदलने की मांग के खिलाफ विरोध के स्वर उठे हैं। इंदौर स्थापना दिवस समारोह समिति द्वारा आयोजित एक बैठक में प्रबुद्धजनों ने इंदौर का नाम बदलने का विरोध किया है। बैठक में ये बातें सामने आई कि इंदौर का नाम बदलने की बात अपने माता-पिता का नाम बदलने के समान है। 
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गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों से इंदौर का नाम बदलने की चर्चा चल रही है। हाल ही में इंदौर का गौरव दिवस मनाने की तारीख तय करने के सिलसिले में हुई बैठक में विधायक रमेश मेंदोला ने फिर से इस बहस को जन्म दिया कि इंदौर का नाम बदला जाना चाहिए। इन सबके बीच इंदौर स्थापना दिवस समारोह समिति द्वारा बैठक आयोजित की गई। यह बैठक इंदौर का नाम बदलने की कवायद के चलते ही रखी गई थी। इसमें समाज के हर तबके के प्रबुद्धजन शामिल हुए और सभी ने एकस्वर में कहा कि इंदौर का नाम बदलने की सोच गलत है। 

माता-पिता का नाम बदलने के समान
बैठक में कवि पं. सत्यनारायण सत्तन ने कहा कि इंदौर का नाम बदलने की बात करना माता-पिता का नाम बदलने के समान है। इस शहर का नाम बदलने की कोशिश की गई तो उसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। हर दौर में इंदौर था, इंदौर है और इंदौर ही रहेगा। कुछ लोग यथार्थ को नकार कर अपना काम करना चाहते हैं। जिस शहर ने 350 साल की यात्रा कर ली, उसका नाम बदलने की बात करने का क्या औचित्य है। इसमें राजनीतिक जुगलबंदी की गंध आ रही है। देवी अहिल्या बाई महादेव की आराधक रहीं। इंद्रेश्वर महादेव के नाम पर ही इंदौर का नाम रखा गया।
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नाम बदलने की सोच गलत
पं. रामचंद्र शर्मा वैदिक ने कहा कि इंदौर का नाम बदलने की सोच गलत है। इस शहर का नाम इंद्रेश्वर महादेव मंदिर के नाम पर पड़ा है। इसे बदलने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। पूर्व विधायक अश्विन जोशी ने कहा कि इंदौर का नाम किसी पुराने शासक द्वारा अपने नाम पर नहीं रखा गया है, जिसे बदलने की बात कही जा रही है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पं. कृपाशंकर शुक्ला ने कहा कि इंदौर तो सदा से मां अहिल्या की नगरी कहलाती है। नाम बदलने जैसी बातों का कोई लाभ नहीं है। इंदौर का नाम तो लोगों के मन-मस्तिष्क में लिखा गया है। पं. गोविंद शर्मा ने कहा कि परशुराम महासभा इस तरह के नाम परिवर्तन के अभियान का विरोध करेगी। पं. धरणीधर मिश्रा का कहना था कि इंदौर के नाम में न तो गुलामी की गंध है, न शर्म की बात है। विजय अड़ीचवाल ने कहा कि इंदौर पूरे देश में पहली बार 1716 में कर मुक्त शहर के रूप में सामने आया था। जब कोई भी एसईजेड नहीं जानता था, उस समय इस शहर में एसईजेड लागू हो गया था। अधिवक्ता कोमल दीक्षित में कहा कि नाम परिवर्तन की यह कोशिश गलत है। राकेश शर्मा, अनूप शर्मा, जय तिवारी सहित अन्य ने भी अपनी बात रखी। 
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