नगरीय निकाय चुनावों की घोषणा होते ही आचार संहिता प्रभावशील हो गई है। अब सबकी नजरें उम्मीदवारों पर टिकी है। कांग्रेस की ओर से तो स्थिति स्पष्ट है लेकिन भाजपा में घमासान मचा हुआ है। यहां दर्जनभर दावेदार हैं लेकिन पार्टी संगठन किस पर भरोसा जताता है यह देखना रोचक होगा। इधर संगठन की गाइडलाइन भी कई दावेदारों की राह में रोड़ा बनी हुई है। इसके चलते स्थिति उलझी हुई है।
दरअसल इंदौर मुख्यमंत्री के सपनों का शहर है। यहां की नगर निगम पर कब्जा जमाना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। हालांकि अब तक तो आसानी से भाजपा का महापौर बनता आया है लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी उलझी हुई है। ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस ने विधायक संजय शुक्ला का टिकट फाइनल कर दिया है। शुक्ला के सामने भाजपा को ऐसा ही उम्मीदवार उतारना पड़ेगा जो उन्हें टक्कर दे सके। कहा तो यह भी जा रहा है कि भाजपा में जो भी उम्मीदवार होगा उसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पसंद अहम रहेगी। उनके सपनों के शहर में उनकी पसंद का ही महापौर वे देखना चाहते हैं। पिछली बार भी विधायक मालिनी गौड़ का टिकट उनकी पसंद से ही दिया गया था। वे शहर के विकास की बागडौर किसी ऐसे नेता के हाथ में नहीं देना चाहेंगे, जिससे काम कराना कठिन हो जाए। ऐसे में अब नाम की तलाश हो रही है कि किस पर दांव खेला जाए।
दावेदारों की लंबी फेहरिस्त
अगर दावेदारों की बात करें तो भाजपा में लंबी फेहरिस्त है। भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय तो कुछ दिन पहले कह चुके हैं कि भाजपा में 20 से ज्यादा दावेदार हैं। इनमें सबसे पहला नाम तो तीन बार के विधायक रमेश मेंदोला का है जो विजयवर्गीय के खास हैं। बार-बार मंत्री बनने की उनकी अटकलें चलती हैं लेकिन हर बार वे मंत्री पद से दूर कर दिए जाते हैं, ऐसे में हो सकता है कि इस बार भाजपा मेंदोला का महौपार उम्मीदवार बनाकर तोहफा दे दे। दूसरी संभावना दो बार के विधायक रहे सुदर्शन गुप्ता की है। उनके शिवराज सिंह चौहान से तो संबंध है ही मगर पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के भी करीबी बताए जाते हैं। पूर्व महापौर कृष्णमुरारी मोघे भी दौड़ में है, हालांकि पिछले कुछ समय से वे ज्यादा चर्चाओं में नहीं है। कोशिश जरूर कर रहे हैं लेकिन उम्र की गाइडलाइन लागू हुई तो मोघे को निराश होना पड़ेगा। सगंठन में पकड़ रखने वाले गोपीकृष्ण नेमा का नाम भी दौड़ में शामिल है। वे सांसद शंकर लालवानी सहित सुमित्रा ताई के करीबी कहे जाते हैं। संगठन के अन्य पदाधिकारियों से भी अच्छे रिश्ते हैं। एक नाम मधु वर्मा का भी है जो आईडीए अध्यक्ष रह चुके हैं। हालांकि वे विधायक चुनाव हार चुके हैं। एक बार पहले महापौर चुनाव भी हारे थे। इन नामों के बीच भाजपा नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता उमेश शर्मा का नाम भी चर्चाओं में है। वहीं विधायक आकाश विजयवर्गीय और एकलव्य सिंह गौड़ को लेकर भी चर्चा हो रही है।
क्या नई गाइडलाइन होगी लागू ?
भाजपा में इन दिनों नई गाइडलाइन की चर्चा जोरों पर है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा मप्र के दौरे पर हैं और उन्होंने कहा है कि टिकट वितरण में भाजपा नए फॉर्मूले के अनुसार काम करेगी। इसके अनुसार कहा जा रहा है कि भाजपा टिकट वितरण में परिवारवाद से मुक्त रहेगी। नेताओं के पुत्र-पुत्री या रिश्तेदारों को टिकट नहीं मिलेगा। साथ ही उम्र का बंधन भी लागू हो सकता है। 50 वर्ष से कम उम्र वालों को टिकट में तरजीह दी जाएगी। दो से तीन बार पार्षद रह चुके नेताओं को भी वंचित रहना पड़ सकता है। वहीं पार्टी में बड़े पदों पर रहने वालों को भी टिकट नहीं दिया जाएगा। हालांकि यह बात नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा लागू करेगी या नहीं इसे लेकर संशय बना हुआ है क्योंकि जेपी नड्डा ने 2024 के लोकसभा चुनाव के तारतम्य में यह बात कही थी। संभवतः 2023 के विधानसभा चुनाव में भी इसे लागू किया जाए, लेकिन नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा इस फॉर्मूले को लागू करती है या नहीं यह कहना जल्दबाजी होगा। यदि यह गाइडलाइन लागू होती है तो इंदौर के जो दावेदार हैं उन सबको निराश होना पड़ेगा और नया नाम सामने आएगा।
डॉक्टर का नाम आया चर्चा में
एक बात यह भी सामने आ रही है कि भाजपा ऐसे नामों पर विचार करेगी जो राजनीति से हटकर हो। इनमें डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग हो सकते हैं। यदि यह तय होता है तो इंदौर में एक प्रतिष्ठित डॉक्टर की दावेदारी मजबूत हो जाएगी। कोरोना काल में उन्होंने प्रशासन के साथ मिलकर काम किया है। उनकी संघ और संगठन में भी पकड़ है। एक प्रशासनिक अधिकारी और सरकारी वकील का नाम भी चर्चाओं में है लेकिन अभी कुछ भी तय नहीं है। यदि भाजपा नई गाइडलाइन के हिसाब से ही टिकट देती है तो इन नामों से विचार किया जा सकता है।