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इंदौर: गोशाला में गायों की मौत के मामले में एसडीएम ने सौंपी जांच रिपोर्ट, शवों के निपटान में बरती लापरवाही

Sat, 05 Mar 2022 07:22 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

पेडमी की गोशाला में हुई गायों की मौत के मामले में एसडीएम ने जांच पूरी कर कलेक्टर को रिपोर्ट सौंपी है। इसमें शवों के निपटान में लापरवाही की बात सामने आई है। पर्याप्त जगह होने के बाद भी गायों के शव खुले में फेंके गए हैं। 
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गोशाला में बंधी हैं बीमार और बुजुर्ग गायें - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पेडमी स्थित गोशाला में हुई गायों की मौत के मामले में एसडीएम ने जांच रिपोर्ट बनाकर कलेक्टर को सौंप दी है। रिपोर्ट में लापरवाही की बात सामने आई है। बड़ी लापरवाही यह है कि गायों की मौत के बाद शव को खुले में ही फेंका जा रहा था। इतना ही नहीं जो ट्रस्ट गोशाला का संचालन करता है उसके पास 50.17 हेक्टेयर जमीन है, जिसमें से 19.47 हेक्टेयर शासकीय है। यह जमीन ट्रस्ट को कब और कैसे मिली इसकी जांच की जरुरत है।
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गौरतलब है कि गत पेडमी में जीवदया मंडल ट्रस्ट की अहिल्या माता गोशाला में सौ से ज्यादा मृत गायें मिली थीं। गोशाला के पीछे खुले में गायों के कंकाल पड़े थे, जिनको गिद्ध व कुत्ते नोंच रहे थे। गोशाला में भी बीमार गायें बंधी हुई थी। उनके खाने-पीने का इंतजाम नहीं था। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे जिसके बाद गोशाला प्रबंधक के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया था। कलेक्टर मनीष सिंह ने इस गोशाला की जांच के लिए एसडीएम प्रतुल सिन्हा को निर्देश दिए थे। एसडीएम ने जांच की और रिपोर्ट बनाकर कलेक्टर को सौंपी। जांच में यह बात सामने आई कि मृत गायों के शवों के निपटान में ट्रस्ट ने लापरवाही की है। मृत गायों का निपटान खुले में किया जा रहा है। गोशाला में कई बूढ़ी और बीमार गायों को धूप, बारिश और ठंड से बचाने के लिए शेड नहीं हैं। ट्रस्ट के पास पर्याप्त भूमि है और इसे सरकारी सहायता भी मिल रही है। इसके बावजूद मृत गायों को खुले में फेंका जा रहा है। ट्रस्ट ने अपनी जमीन में से बड़ा हिस्सा खेती के लिए किराए पर दे रखा है, लेकिन इसके लिए रजिस्ट्रार पब्लिक ट्रस्ट से कोई अनुमति नहीं ली है। ट्रस्ट अपनी आय, खर्च और बजट का लेखा-जोखा पेश करने में भी विफल रहा है। जांच रिपोर्ट में प्रस्तावित किया गया कि इस मामले में रजिस्ट्रार पब्लिक ट्रस्ट की ओर से भी उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। 

दो साल में मिला 14 लाख रुपये का अनुदान
इधर यह बात भी सामने आ रही है कि गोशाला को 15 माह से अनुदान नहीं मिला था। 20 रुपये प्रति गाय के हिसाब से पिछले दो सालों में 14 लाख रुपये अनुदान के रूप में मिले हैं। 2020 में लगभग 10 लाख रुपये का अनुदान मिला तो 2021 में करीब चार लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। गोशाला संचालकों के अनुसार जो अनुदान मिला है वह खर्च के हिसाब से बेहद कम है। इतने कम अनुदान में रखरखाव करना बहुत मुश्किल है। इधर एसडीएम की रिपोर्ट मिलने के बाद अब कलेक्टर आगे की कार्रवाई तय करेंगे। कलेक्टर मनीष सिंह ने कहा है कि पेडमी में मृत गायों के निपटान में ही बड़ी लापरवाही सामने आई है। यह समस्या अन्य गोशालाओं में भी हो सकती है। इसलिए जिले की सभी गोशालाओं के संचालकों की एक बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी और समस्या का हल निकाला जाएगा।
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पशु चिकित्सा विभाग ने रिपोर्ट सौंपकर दिया सुझाव
इस मामले में पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने भी रिपोर्ट बनाकर कलेक्टर को सौंपी है। इसमें गोशाला की लापरवाही के बात तो कही ही है साथ में सुझाव भी दिया है कि गोशाला के पास काफी जमीन है। इस जमीन के एक हिस्से में पहले से लंबी और गहरी ट्रेंच खोद ली जाए। मृत गायों को इसमें दफनाया जाए। इससे संक्रमण भी नहीं फैलेगा और गायों के शव का उचित तरीके से निस्तारण हो सकेगा। अधिकारियों ने पेडमी से गायों के शवों और कंकालों के नमूने भी लिए हैं। इन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। 
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