मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने शहर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था, जर्जर सड़कों और पुराने अदालती आदेशों के पालन में हो रही देरी पर नगर निगम समेत संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की पीठ ने सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि केवल 311 एप पर शिकायतें दर्ज करना ही काफी नहीं है, धरातल पर उनका समाधान कहां है?
राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से वर्ष 2019 से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यातायात सुधार, विभागों के बीच तालमेल और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया और शिरीन सिलावट ने अदालत के सामने यातायात प्रबंधन, पुलिसबल की कमी और अव्यवस्थित बुनियादी ढांचे का पूरा ब्योरा रखा।
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सिग्नलों में समन्वय का अभाव और खाली पद
अदालत को अवगत कराया गया कि इंदौर शहर में कुल 92 ट्रैफिक सिग्नल कार्यरत हैं। इनमें से 58 स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत और 34 नगर निगम के प्रशासनिक नियंत्रण में हैं। हालांकि केवल 28 सिग्नल ही इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) से जुड़ पाए हैं। अलग-अलग निकायों के अधीन संचालित होने से सिग्नलों में आपसी तालमेल नहीं रहता, जिससे वाहन चालकों को बार-बार रुकना पड़ता है और चौराहों पर जाम लगता है।
881 पद, केवल 660 पुलिसकर्मी उपलब्ध
यातायात पुलिस में स्वीकृत 881 पदों के मुकाबले केवल 660 पुलिसकर्मी उपलब्ध हैं, यानी 221 पद खाली पड़े हैं। इस जनशक्ति की कमी से व्यस्त चौराहों पर यातायात नियंत्रित करना कठिन हो गया है। समस्या के समाधान के लिए शहर के करीब 40 प्रमुख प्रवेश मार्गों पर स्वचालित हाइड्रोलिक बैरियर लगाने का प्रस्ताव दिया गया। वर्तमान में इन प्रवेश द्वारों पर भारी वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए तैनात 140 से 170 पुलिसकर्मियों को उस ड्यूटी से मुक्त कर शहर के भीतर प्रमुख चौराहों पर लगाया जा सकता है।
एप पर शिकायत के बजाय समाधान पर जोर
सड़कों पर गड्ढों और बदहाली का विषय उठने पर नगर निगम ने 311 एप पर शिकायत दर्ज कराने की बात कही। इस पर अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि एप पर शिकायत दर्ज होना पर्याप्त नहीं है, वास्तविक कार्रवाई और समय पर मरम्मत होना जरूरी है। अदालत ने निगम से प्राप्त, निस्तारित और लंबित शिकायतों का पूरा ब्योरा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
विजय नगर चौराहे से देवास नाका तक निर्माणाधीन फ्लाईओभर के कारण सड़क का बड़ा हिस्सा खोदकर बैरिकेडिंग कर दिया गया है। निर्माण कार्य शुरुआती चरण में होने के बावजूद उचित वैकल्पिक मार्ग और सर्विस रोड न होने से कंकड़, पत्थर और उड़ती धूल के बीच दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का जोखिम बढ़ गया है। इसके अतिरिक्त, इंदौर में केवल 26 चिह्नित पार्किंग स्थल हैं, जबकि नागपुर में 51, कानपुर में 42 और लखनऊ में 62 स्थल उपलब्ध हैं। सीमित स्थान से सड़कों पर अवैध पार्किंग बढ़ रही है।
एकल समन्वय अधिकारी और विस्तृत कार्ययोजना का प्रस्ताव
सुनवाई के दौरान विभागों के बीच बेहतर तालमेल और अदालती आदेशों के पालन के लिए अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी को एकल समन्वय एवं पर्यवेक्षण अधिकारी नियुक्त करने का सुझाव दिया गया। प्रस्ताव के अनुसार सभी विभाग उन्हें दैनिक प्रगति रिपोर्ट सौंपेंगे, जिसमें पूरे हुए कार्य, लंबित समस्याएं, बाधाएं और समाधान की समयसीमा दर्ज होगी। विभागों को आपसी समन्वय से विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर अदालत में पेश करने के लिए 21 दिन का समय देने का अनुरोध भी किया गया।