करीब 150 साल से अधिक पुरानी और प्रतिष्ठित संस्था डेली कॉलेज में बुधवार को उलटफेर हुआ। रजिस्ट्रार फर्म एंड सोसायटी में हुई शिकायत के बाद बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह झाबुआ और उनके बेटे जयसिंह झाबुआ के आने पर रोक लगा दी गई। इसके बाद नए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का गठन हुआ। इसमें देवास के व्रिकम सिंह पवार को अध्यक्ष और भाजपा विधायक राज्यवर्धन सिंह (नरसिंहगढ़) को उपाध्यक्ष चुना गया है। वर्तमान प्राचार्य नीरज कुमार बधौतिया को सेवा विस्तार देने पर भी रोक लगा दी गई। गुरमीत कौर बिंद्रा को नया प्राचार्य चुना गया है। वे डेली कॉलेज के इतिहास में पहली महिला प्राचार्य होंगी। अहमद अंसारी कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य बनाए गए।
जानकारी के मुताबिक सतबीर सिंह छाबड़ा ने भोपाल में रजिस्ट्रार फर्म एंड सोसायटी में शिकायत की थी कि वर्ष 2020 में गठित बोर्ड आफ गवर्नर्स में अध्यक्ष नरेंद्र सिंह झाबुआ ने अपने बेटे जयसिंह झाबुआ को बोर्ड में अनुचित तरीकों से प्रवेश दिया है। इसके बाद वहां से नोटिस दिए गए और उन्हें हटाने को कहा गया। बुधवार को बोर्ड की बैठक बुलाई गई। इसमें व्रिकम सिंह पवार को अध्यक्ष और राज्यवर्धन सिंह (नरसिंहगढ़) को उपाध्यक्ष चुना गया है। दोनों ही भाजपा के हैं। इधर बोर्ड ने गुरमीत सिंह बिंद्रा को नया प्राचार्य बनाया है। वे देहरादून (उत्तराखंड) के वेलहैम्स स्कूल में थीं। वे डेली कॉलेज के इतिहास में पहली महिला प्राचार्य हैं। वर्ष 1877 में पहले प्राचार्य के बाद वे 18वीं प्राचार्य होंगी। दरअसल, डेली कॉलेज के मैनेजमेंट में हुए इस बदलाव की देशभर में चर्चा हुई और हर कोई चौंक गया। कहा जा रहा है कि अचानक आए इस फैसले के पीछे खींचतान वजह रही जो लंबे समय से चल रही है। बोर्ड सदस्य आपस में ही उलझे हुए थे। प्राचार्य के चयन के लिए भोपाल में इंटरव्यू रखे गए ताकि जल्द प्राचार्य नियुक्त किया जा सके। हालांकि बोर्ड के ही कुछ सदस्य बधौतिया के कार्यकाल को बढ़ाने के पक्ष में थे तो कुछ उनकी जगह नया प्राचार्य चाहते थे।
विक्रमसिंह पवार, देवास
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इस तरह हुआ पूरा घटनाक्रम
गौरतलब है कि 1870 में डेली कॉलेज की स्थापना हुई थी और तब से ही यहां राजपरिवारों का दबदबा रहा है। करीब 118 एकड़ में यह स्कूल फैला है। बुधवार को हुए घटनाक्रम के पीछे यह बात भी सामने आ रही है कि लंबे समय से बोर्ड के कुछ लोग प्राचार्य को हटाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन बोर्ड अध्यक्ष नरेंद्र सिंह झाबुआ उन्हें हटाने के पक्ष में नहीं थे। बोर्ड चुनाव के समय संदीप पारीख, प्रियव्रत सिंह (खिलचीपुर) और राज्यवर्धन सिंह (नरसिंहगढ़) एक ओर थे जबकि दूसरी ओर मोनू भाटिया, धीरज लुल्ला, विक्रमसिंह पवार और सुमित चंडोक थे। बदलते राजनीतिक परिवेश में राज्यवर्धन सिंह (नरसिंहगढ़) का भी साथ दूसरे खेमे को मिल गया। इसके बाद रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोसायटी के आदेश का हवाला देते हुए पैरेंट नॉमिनी जयसिंह झाबुआ को हटाया गया और उनकी जगह संजय पाहवा ने ली। इससे बोर्ड में इस खेमे के छह वोट हो गए और बहुमत के बाद देवास के विक्रमसिंह पवार को अध्यक्ष बना दिया गया। विक्रमसिंह पवार देवास विधायक गायत्रीराजे पवार के पुत्र हैं। उनके पिता स्व. तुकोजीराव पवार मप्र शासन में मंत्री रह चुके हैं। देवास में पवार राजपरिवार का ही राजनीतिक वर्चस्व है और करीब 30 से अधिक सालों से देवास में पवार परिवार के सदस्य विधायक हैं। पहले तुकोजीराव पवार लंबे समय तक विधायक रहे। उनके निधन के बाद उनकी पत्नी गायत्रीराजे पवार यहां से विधायक हैं।