मप्र उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर
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रामनवमी के जुलूस के दौरान खऱगोन में कथित रूप से अवैध तरीके से निर्मित बैकरी व रेस्टोरेंट को तोड़े जाने के मामले में हाईकोर्ट इंदौर ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। रेस्टोरेंट और बैकरी मालिकों ने इस संबंध में याचिका दायर की थी।
जानकारी के मुताबिक रेस्टोरेंट के मालिक अतीक अली ने 22 अप्रैल और बैकरी के मालिक अमजद राशिद ने 28 अप्रैल को इस संबंध में अलग-अलग याचिका दायर की थी। इस मामले में मप्र उच्च न्यायालय इंदौर खंडपीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। शनिवार को याचिकाकर्ताओं के वकील ने यह जानकारी दी है। याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में दावा किया है कि खरगोन प्रशासन ने उनकी बात सुने बिना ही उनकी संपत्तियों पर बुलडोजर चलाकर मनमानी और अवैध कार्रवाई की। रेस्टोरेंट मालिकों की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्यमित्र भार्गव ने तर्क दिया कि संपत्ति के विध्वंस के मामले में कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किया गया था और उनकी संपत्ति के केवल उस हिस्से को तोड़ा गया था जिसे प्रावधानों के तहत कंपाउंड नहीं किया जा सकता था।
दंगों में नहीं थी कोई भूमिका
याचिकाकर्ताओं के वकील अशर वारसी ने कहा कि दंगों के बाद खरगोन प्रशासन ने मेरे मुवक्किल के रेस्टोरेंट के एक हिस्से को ध्वस्त कर दिया, जबकि दूसरे मुवक्किल की बैकरी को अवैध संरचनाओं को हटाने के नाम पर पूरी तरह से तोड़ दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि खरगोन में हिंसा के बाद असामाजिक तत्वों ने 2028 वर्ग फुट में फैली बैकरी में आग लगा दी थी और दो दिन बाद 12 अप्रैल को प्रशासन ने न केवल बैकरी बल्कि वहां रखे जनरेटर को भी तोड़ दिया। वारसी ने आगे दावा किया कि उनके मुवक्किलों की खरगोन दंगों में कोई भूमिका नहीं थी और वे ध्वस्त संपत्तियों के कानूनी मालिक हैं और सभी करों का भुगतान कर रहे थे। वकील ने कहा कि उन्होंने याचिकाकर्ताओं की ओर से अपील की है कि विध्वंस के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी जांच कराकर उन्हें दंडित किया जाए। वारसी ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि उनकी ध्वस्त संपत्तियों का पुनर्निर्माण किया जाए और उन्हें उनके नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए। बता दें कि 10 अप्रैल को खरगोन शहर में रामनवमी के जुलूस के दौरान पथराव हुआ था, जिसमें झड़प और आगजनी हुई थी।