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इंदौर: वाणिज्यिक कर विभाग की बड़ी कार्रवाई, 315 करोड़ रुपये का जीएसटी फर्जीवाड़ा पकड़ा

Fri, 25 Feb 2022 09:22 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

वाणिज्यिक कर विभाग ने बोगस व्यापारियों, अस्तित्वहीन फर्मों द्वारा की जा रही करोड़ों की टेक्स चोरी का पर्दाफाश कर 315 करोड़ का जीएसटी फर्जीवाड़ा पकड़ा है।
 
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जीएसटी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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स्टेट जीएसटी एंटी इवेजन ब्यूरो इंदौर-ए के अधिकारियों द्वारा डाटा एनालिसिस कर बोगस फर्मों कि सप्लाई चेन को उजागर किया गया, जो करोड़ों रुपये का बोगस टर्नओवर कर रहे थे। डाटा एनालिसिस के दौरान पाया गया कि कुछ फर्म नवीन पंजीयन लेकर कम समय में ही बड़ा टर्नओवर कर रही थी। आर्टिफिशियल इन्टेलिजेन्स जीओ टेगिंग तथा व्यवसाय स्थलों के प्राथमिक परीक्षण के दौरान पाया गया कि व्यवसाय स्थलों पर किसी भी प्रकार की व्यवसायिक गतिविधियां संचालित होना नहीं पाई गईं तथा माल वास्तविक रूप प्रदाय किए बिना ही फर्जी बिलों के आधार पर अन्य व्यवसायियों को आईटीसी का लाभ दिया गया। इसके अतिरिक्त इनके पंजीयन में दर्शाए गए दस्तावेजों में भी विसंगतियां पाई गईं। इनकी संदिग्ध सप्लाय चेन का विश्लेषण कर ठोस आधार ज्ञात होने पर वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा अस्तित्वहीन फर्मों पर कार्रवाई की।
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छापे की कार्रवाई में लगभग 315 करोड़ रुपये के बोगस टर्नओवर का पर्दाफाश किया गया। इंदौर सहित नीमच में एक साथ कई फर्मों के ठिकानों पर कार्रवाई की गई। छापे की कार्रवाई के दौरान कई फर्म बोगस पाई गईं, जो केवल कागजों पर संचालित हो रही थीं। इनके द्वारा रिटर्न में डीओसी की 315 करोड़ की सप्लाई दर्शाकर लगभग 15 करोड़ रुपये का बोगस आईटीसी का लाभ अन्य फर्मों को दिया गया।

बोगस फर्मों में मुख्यतः श्रीनाथ सोया एक्सिम कॉर्पोरेट, श्री वैभव लक्ष्मी इंडस्ट्रीज, अग्रवाल ऑर्गेनिक - अग्रवाल ओवरसीज, जे.एस भाटिया इंटरप्राईजेस इत्यादि हैं। इनमें से मेसर्स श्रीनाथ सोया एक्सिम कॉपोरेट फर्म एक ऑटो चालक सचिन पटेरिया के नाम पर संचालित हो रही थी, जिसके पंजीयन के समय आवेदन के साथ कूटरचित किरायेनामा संलग्न था। जिसके मकान मालिक की मृत्यु कई वर्ष पूर्व में ही हो चुकी है, जबकि किराये नामे पर मृत व्यक्ति के फर्जी हस्ताक्षर थे। इसी तरह मेसर्स श्री वैभव लक्ष्मी इंडस्ट्रीज का प्रोप्राइटर अजय परमार व्यवसाय स्थल पर नहीं पाया गया। फर्म के पंजीयन आवेदन के समय प्रस्तुत किरायेनामे फर्जी पाए गए। जांच में किरायेनामे में दर्ज व्यवसायी स्थल के मालिक द्वारा किरायेनामे को फर्जी बताते हुए बयान दिया गया कि मेरे द्वारा किसी भी फर्म को व्यवसाय स्थल किराये पर नहीं दिया गया। इसी तरह अग्रवाल ऑर्गेनिक एवं अग्रवाल ओवरसीज अस्तित्वहीन पाई गईं।
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