एशिया के सबसे बड़े बायो गैस प्लांट का लोकार्पण हो गया, लेकिन यह शुरुआतभर है। इसके आगे भी अभी कई मुकाम हासिल करने की तैयारी है। इस बायो गैस प्लांट का विश्व बायो गैस फोरम से प्रमाणीकरण करवाए जाने की योजना है। ऐसा होने पर यह संभावना व्यक्त की जा रही है कि इंदौर का प्लांट विश्व में सबसे अधिक क्षमता वाला बायो सीएनजी प्लांट भी हो सकता है।
दरअसल, इंदौर में बना यह प्लांट करीब 15 एकड़ जमीन में फैला है। इस बायो सीएनजी प्लांट में 550 टन गीले कचरे से 17500 किलो बायो सीएनजी तैयार होगी। इसकी लागत 150 करोड़ रुपये है और अगस्त 2020 में निर्माण शुरू हुआ था। 100 टन खाद प्रतिदिन तैयार होगी। 600 टन प्रतिदिन गीले कचरे की कटाई कर सीएनजी बनाने के लिए स्लरी तैयार की जाएगी। 4 डाइजेस्ट में स्लरी को डाला जाएगा जिससे बायोगैस तैयार होगी। अभी 250 टन क्षमता के दो डाइजेस्टर में गीला कचरा डालकर बायो सीएनजी गैस तैयार की जा रही। अन्य दो डाइजेस्टर में कल्चर तैयार होग रहा है, इसमें मार्च माह के शुरुआत में गीला कचरा डाल बायो सीएनजी का उत्पादन शुरु किया जाएगा। 65 कर्मचारी यहां काम करेंगे और दो शिफ्कट में काम होगा। 400 सिटी बसों को बायो सीएनजी उपलब्ध करवाने की योजना है। फरवरी माह के अंत तक 2 हजार किलो बायो सीएनजी तैयार होगी। इस प्लांट से 1 लाख 30 हजार टन कार्बन डाई ऑक्साइड की प्रतिवर्ष बचत होगी । 2.5 करोड़ रुपये प्रति वर्ष बायोसीएनजी बनाने वाली कंपनी नगर निगम को देगी।
गीले कचरे में मात्र 0.5 से 0.9 प्रतिशत ही रिजेक्ट उपलब्ध
कलेक्टर मनीष सिंह इस बारे में कह चुके हैं कि इंदौर नगर का वेस्ट सेग्रीगेशन उत्तम क्वालिटी का होने से आईईआईएसएल नई दिल्ली द्वारा इस प्लांट को इंदौर में स्थापित करने का निर्णय लिया गया। प्लांट स्थापना के निर्णय के पूर्व उक्त कंपनी द्वारा गीले कचरे के विगत एक वर्ष में 200 से अधिक नमूने लेकर परीक्षण करवाया गया। परीक्षण के परिणाम के आधार पर सामने आया कि गीले कचरे में मात्र 0.5 से 0.9 प्रतिशत ही रिजेक्ट उपलब्ध है, जो कि अन्य यूरोपीय देशों की तुलना में भी उच्च गुणवत्ता का होना पाया गया। वहीं इस प्लांट से प्रतिदिन 550 टन गीले कचरे का निपटान होगा जिससे वायु गुणवत्ता सुधार भी होगा। ऐसे में हर तरह की खासियत से युक्त यह प्लांट विश्वस्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित है।
वैज्ञानिक तरीके से बनाई जा रही गैस व खाद
इंदौर में जो प्लांट तैयार हुआ है उसे एशिया का सबसे बड़ा बायो सीएनजी प्लांट माना जा रहा है। इसी बीच यह बात सामने आई है कि जर्मन में ही इस तरह बायोगैस प्लांट है। इस जानकारी के बाद अब विश्व बायोगैस फोरम के माध्यम से इस प्लांट का प्रमाणिकरण करवाया जाएगा। जानकारी मिली है कि जर्मनी में जो प्लांट है वहां डायजेस्टरों के माध्यम से गीले कचरे से बिजली बनाई जाती है। इंदौर में गीले व सूखे को अलग-अलग किया जा रहा है। वैज्ञानिक तरीके से इसका निराकरण कर गैस व खाद बनाई जा रही है। इंदौर ने तकनीकी, सामाजिक व आर्थिक तरीके को सही उपयोग कर इस प्लांट को देश के अन्य शहरों के लिए उदाहरण के रुप में प्रस्तुत किया है। इसके चलते विश्व बायोगैस फोरम से इसका प्रमाणीकरण करवाने की योजना है। इसके बाद यह संभावना भी है कि इंदौर का प्लांट विश्व का सबसे बड़ा प्लांट माना जाए।