यूक्रेन में फंसी बुरहानपुर के शाहपुर की रश्मि ने हालात बयां किए।
- फोटो : अमर उजाला
यूक्रेन में फंसी बुरहानपुर की रश्मि सूर्यवंशी, सीधी जिले की शुभांगी बघेल और रायसेन जिले की माधवी रायकवार ने वीडियो संदेश जारी कर मदद की गुहार लगाई। उन्होंने कहा- हमें यहां से बाहर निकाला जाए।
तीनों छात्राएं यूक्रेन के निप्रो शहर में मेडिकल की शिक्षा हासिल कर रही हैं। यूक्रेन में फंसी बुरहानपुर के शाहपुर की रश्मि बोलीं- यहां हालात बहुत खराब है। 70-80 किमी की दूरी पर रशियन आर्मी आ गई है। हमें नहीं पता कि कब अटैक हो जाए और हम बाद में बात कर पाएं या नहीं। उन्होंने कहा ज्यादातर विद्यार्थी कैब या बस से बॉर्डर तक गए हैं, लेकिन यह बहुत रिस्की है। इसलिए सरकार हमारी मदद करे। दूतावास से भी कोई मदद नहीं मिल रही। अधिकारियों ने कहा- हम खुद बंकरों में छिपे हैं। यहां बमबारी हो रही है।
यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों में से अधिकांश मेडिकल स्टूडेंट्स हैं। यानी कि वे छात्र जो डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने के लिए यूक्रेन चले गए थे। यूक्रेन में मेडिकल पढ़ाई का खर्च भारत के निजी कॉलेजों के अपेक्षा आधे से भी कम आता है। जहां भारत के सरकारी कॉलेजों में सालाना मेडिकल पढ़ाई का खर्च करीब ढाई से तीन लाख रुपये पढ़ता है। जबकि प्राइवेट संस्थानों में यही फीस हर साल 10 लाख से 15 लाख के करीब पढ़ती है। यानी की पांच साल की पढ़ाई का खर्चा करीब 75 लाख से 80 लाख रुपये तक होता है। अगर कॉलेज नामचीन है तो यह खर्च एक करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। वहीं, यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई की फीस सालाना दो से चार लाख रुपये के बीच होती है। यानी की पांच साल की पूरी पढ़ाई का खर्च तकरीबन 25 लाख से 30 लाख रुपये तक पड़ता है।