मध्य प्रदेश में महिला मंत्री इमरती देवी के खिलाफ पूर्व सीएम कमलनाथ की अपमानजनक टिप्पणी को लेकर सियासी बवाल मच गया है। इमरती देवी को कथित तौर पर ‘आइटम’ कहे जाने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत भाजपा नेताओं ने दो घंटे का मौन व्रत रखा, वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने कमलनाथ से माफी मांगने की मांग की है।
मुख्यमंत्री चौहान ने सुबह 10 बजे कैबिनेट मंत्री नरोत्तम मिश्रा, भूपेंद्र सिंह, विश्वास सारंग और कुछ महिला विधायकों के साथ भोपाल में मिंटो हॉल मौन व्रत रखा। वहीं, सिंधिया ने सांसद शंकर लालवानी के साथ इंदौर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने रीगल स्क्वायर पर मौन व्रत पर बैठे। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा, प्रभात झा ने अन्य नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ ग्वालियर में विरोध जताया। कमलनाथ की टिप्पणी पर रविवार को चौहान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने ट्वीट किया, पूर्व सीएम ने अपने ओछे बयान से कांग्रेस की विकृत और घृणित मानसिकता का परिचय दिया है। आपने सिर्फ इमरती देवी का अपमान नहीं किया है, बल्कि राज्य की हर बेटी और बहन को अपमानित किया है। इमरती देवी उन 21 विधायकों में शामिल थीं, जिन्होंने सिंधिया के समर्थन में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद कमलनाथ सरकार गिर गई थी।
सार्वजनिक तौर पर माफी मांगे कांग्रेस: मायावती
वहीं, बसपा प्रमुख ने ट्वीट किया, उपचुनाव लड़ रही दलित महिला नेता के बारे में वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व सीएम की टिप्पणी बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। कमलनाथ के इस बयान से कांग्रेस की दलित समाज के प्रति सोच का पता चलता है। कांग्रेस को इस पर संज्ञान लेते हुए सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी चाहिए।
क्या कहा था कमलनाथ ने
दरअसल, इमरती देवी के खिलाफ डबरा विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ रहे कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश राजे के लिए प्रचार करते हुए कमलनाथ ने रविवार को कहा था, डबरा से सुरेश जी हमारे उम्मीदवार हैं। सरल स्वभाव के सीधे सादे हैं। ये तो उसके जैसे नहीं हैं। क्या है उसका नाम? इस बीच, वहां मौजूद जनता जोर जोर से इमरती देवी पुकारने लगी। इसके बाद कमलनाथ ने हंसते हुए कहा, मैं क्या उसका नाम लूं। आप तो उसको मेरे से ज्यादा पहचानते हैं। आपको तो मुझे पहले ही सावधान कर देना चाहिए था। ये क्या आइटम है?
चुनाव आयोग ने मांगी रिपोर्ट
चुनाव आयोग ने डबरा विधानसभा सीट से भाजपा की महिला उम्मीदवार इमरती देवी के खिलाफ कमलनाथ द्वारा रविवार को की गयी इस टिप्पणी पर सोमवार को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर, हमने एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यह मंगलवार को आयोग को मिल जाएगी। इसके आधार पर आयोग विचार करेगा।
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने भी यह मामला चुनाव आयोग को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा है। चुनाव आयोग के अधिकारी ने कहा कि जब तक हमें एनसीडब्ल्यू से संदेश मिला, हम मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांग चुके थे।
मुख्यमंत्री चौहान ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कमलनाथ को पार्टी के सभी पदों से हटाने की मांग की, जबकि केन्द्रीय मंत्री तोमर ने कहा कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी अगर नारी के सम्मान को महत्व देते हैं और दलितों की बात करते हैं, तो कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और कमलनाथ को इमरती देवी सहित महिलाओं से माफी मांगकर पश्चाताप करना चाहिए।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा की गई टिप्पणी पर प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी सोमवार को ग्वालियर जिले के डबरा में फूट-फूट कर रोईं। उनके रोने का वीडियो स्थानीय टेलीविजन चैनलों पर दिखाई देने के साथ ही सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया है।
इमरती ने कमलनाथ पर पलटवार करते हुए डबरा में मीडिया से कहा, वह (कमलनाथ) बंगाल से आया है। उसको बोलने की सभ्यता नहीं है। एक हरिजन महिला की इज्जत करना वह क्या जानता है? ऐसे लोगों को मध्य प्रदेश में रहने का कोई हक नहीं है।
उन्होंने कहा, मध्य प्रदेश में मां-बेटियों को लक्ष्मी के रूप में माना जाता है और आज वह मध्य प्रदेश की सारी लक्ष्मियों को गाली दे रहा है। मैं चाहती हूं कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी कमलनाथ को अपनी पार्टी से हटाएं।
इमरती ने कहा, मध्य प्रदेश में तीन नवंबर को 28 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में कमलनाथ एक विधायक नहीं जिता सकते। मैं तो कमलनाथ को भाई के रूप में समझती थी, लेकिन वह तो राक्षस है।
कमलनाथ को नोटिस भेजेगा महिला आयोग
मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग जल्द ही कमलनाथ को नोटिस भेजेगा। आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा, महिला मंत्री के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने पर आयोग कमलनाथ को नोटिस भेजेगा। साथ ही चुनाव आयोग को भी पत्र लिखा जाएगा।