महामारी का डर इतना है कि कई बेटे अपने मां-बाप को आखिरी विदाई में कंधा देने से डर रहे हैं, वहीं एक बेटा अपनी मां की सेवा कर मिसाल पेश की है। यह प्रेरणादायी कहानी मध्यप्रदेश के ग्वालियर की है। जहां 2013 बैच के मध्यप्रदेश कैडर के आइएएस अधिकारी अनूप कुमार सिंह ने कोरोना संक्रमित अपनी मां की सेवा के लिए कलेक्टर बनने से इनकार कर दिया।
दरअसल, अनूप कुमार सिंह जबलपुर में अपर कलेक्टर के पद पर तैनात हैं। पिछले दिनों मध्य प्रदेश शासन ने उन्हें दमोह का कलेक्टर बनाने का आदेश जारी किया, लेकिन बीमार मां की सेवा के लिए अनूप सिंह ने इस पद को स्वीकार करने से मना कर दिया उन्होंने कहा कि मां को बचाने के लिए मैं आखिरी दम तक संघर्ष करूंगा क्योंकि मां की सेवा से बड़ी दुनिया की कोई सेवा नहीं हो सकती। अनूप सिंह ने यह कहते हुए पद को अस्वीकार कर दिया कि अपनी मां को बचाने के लिए आखिरी दम तक हार नहीं मानूंगा। इसके लिए मुझे डीएम का पद क्यों ना छोड़ना पड़े।
दिन रात सेवा करते रहे आईएएस अधिकारी
अनूप कुमार सिंह मूल रूप से कानपुर के रहने वाले हैं। उनका पैतृक घर इटावा है। बीमारी के दौरान उनकी मां इटावा में ही थीं। 13 अप्रैल, 2021 को उनकी 67 वर्षीय मां रामदेवी की तबियत खराब हुई, तबियत खराब होने के बाद अनूप सिंह ने मां को ग्वालियर के अस्पताल में भर्ती कराया जहां डॉक्टरों ने मां को वेंटिलेटर पर रखा और एक सप्ताह तक उनका डायलिसिस किया गय, लेकिन 18 अप्रैल को रमादेवी का निधन हो गया। इस दौरान अनूप सिंह अपनी मां की दिन रात सेवा करते रहे। जब अनूप कुमार सिंह की मां की बामारी के बारे सरकार को पता चला तो आदेश में बदलाव करते हुए उन्हें जबलपुर में ही पदस्थ रखा।
सरकार ने दमोह का कलेक्टर बनाया था
फरवरी, 2019 में अनूप कुमार सिंह ग्वालियर में बतौर अपर कलेक्टर तैनत हुए और 14 जून, 2020 तक यहां रहे। उसके बाद शासन ने उन्हें जबलपुर ट्रांसफर कर दिया। अनूप सिंह के परिवार में पिता और तीन बहनें हैं। अनूप कुमार सिंह मां की तो नहीं बचा पाए पर मां की सेवा के लिए कलेक्टर पद ठुकराकर साबित कर दिया कि मां की सेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं होती।