इंदौर के महाराजा यशवंतराव (एमवाय) अस्पताल में एक परिवार को अपने घर के पुरुष सदस्य के शव की जगह एक महिला का शव दे दिया गया।
परिवार को इसका पता तब चला जब शव को श्मशान ले जाया गया। अस्पताल में शव के बदलने के कारण ऐसा हुआ।
एक दुर्घटना में मौत के बाद इंदौर के गौरीनगर के दिगंबर खामकर (40) का शव उनके परिवार ने एमवाय अस्पताल से लिया।
मॉर्चुरी के कर्मचारी ने दिगंबर के शव के बदले पहले से सिलकर रखी एक महिला की लावारिस लाश परिजनों को दे दी।
मामला चार दिन पुराना था इसलिए परिवार वालों ने शव खोलकर नहीं देखा और उसे अंतिम संस्कार के लिए ले गए। जब श्मशान में रीती रिवाज करने के लिए कपड़ा खोला तो नाक में नथनी और लंबे बाल दिखे। यह देख वहां मौजूद परिजन हैरान हो गए और अस्पताल दौड़े।
इसके बाद परिवारवालों ने अस्पताल में हंगामा किया लेकिन उसके बाद भी शव ढूंढने के लिए उन्हें बहुत भागदौड़ करनी पड़ी। एमवाय अस्पताल में पहले भी लापरवाही की घटनाएं सामने आई हैं।
अस्पताल में ही था शव
अस्पताल से पता चला कि उन्होंने शव अंतिम संस्कार करने वाली संस्था को सौंप दिया है। संस्था से जानकारी मिली की शव का अंतिम संस्कार कर दिया है। दिगंबर के बेटे श्मशान पहुंचे तो अंतिम संस्कार हो चुका था।
बेटों को शव पर संदेह हुआ क्योंकि दिगंबर के पैर में रॉड लगी थी लेकिन लाश के जलने के बाद राख से रॉड नहीं मिली। फिर से अस्पताल गए।
चार घंटे बाद असली लाश पोस्टमार्टम रूम में ही मिली। इसके बाद अंतिम संस्कार हो पाया।
बदल गई थी शव की जगह
दिगंबर खामकर 20 जुलाई को दुधिया गांव में एक अज्ञात वाहन से टक्कर लगने से घायल हो गए थे। उन्हें एमवाय अस्पताल लाया गया जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।