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हनीट्रैप केस: एसआईटी को लेकर एमपी पुलिस में रार, डीजी बोले- डीजीपी को सुपरविजन से हटाया जाए

Sun, 29 Sep 2019 10:32 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
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पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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मध्यप्रदेश में हनीट्रैप मामले की जांच पर विवाद दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। अब एमपी पुलिस के स्पेशल डीजी पुरुषोत्तम शर्मा ने खुलकर प्रदेश पुलिस के मुखिया वीके सिंह पर निशाना साधा। उन्होंने पत्रकार वार्ता में कहा कि जांच के लिए गठित एसआईटी के सुपरविजन से डीजीपी को हटाया जाए।

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डीजी पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि वह इस मामले में आईपीएस एसोसिएशन से भी चर्चा करेंगे। हालांकि इसे उन्होंने अपना व्यक्तिगत राय बताया। इससे मध्यप्रदेश पुलिस में चल रही आपसी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। बता दें कि राज्य सरकार जांच के लिए गठित एसआईटी चीफ को पहले ही बदल चुकी है। सरकार ने पहले आईजी सीआईडी फिर एडीजी स्तर के अफसर को एसआईटी चीफ बनाया और बाद में बदला।

एसआईटी को लेकर दुविधा में सरकार

कमलनाथ सरकार एसआईटी को लेकर दुविधा में है। सूत्रों के अनुसार, विवाद बढ़ने के बाद सरकार अब डीजी पुरुषोत्तम शर्मा पर कार्रवाई कर सकती है क्योंकि डीजीपी और एसआईटी पर कोई भी एक्शन लेना मुश्किल होगा। डीजीपी का दो साल का कार्यकाल पूरा नहीं हुआ है और सीएम कमलनाथ इस मामले का जल्द ही पटाक्षेप चाहते हैं।

गाजियाबाद में मध्यप्रदेश पुलिस की सायबर सेल ने बिना सरकारी मंजूरी के फ्लैट ले रखा था। पुलिस महानिदेशक वीके सिंह ने इस मामले की जानकारी होने के बाद कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को फटकारा और पूछा कि इतनी दूर सायबर सेल के लिए फ्लैट लेने का क्या कारण था। इसके बाद हरकत में आई पुलिस ने आनन-फानन में सायबर सेल से फ्लैट खाली करवा लिया है।

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सूत्रों के अनुसार, मध्यप्रदेश पुलिस की सायबर सेल ने सरकारी कामकाज के नाम पर दिल्ली से सटे गाजियाबाद जिले के एक पॉश इलाके में किराये का फ्लैट लिया हुआ है। जांच शुरू हई तो सवाल उठा कि फ्लैट दिल्ली से दूर वो भी बिना शासकीय अनुमति के क्यों लिया गया।

एसआईटी की नजर

हनीट्रैप मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) की नजर मध्यप्रदेश के कई आईएएस अफसरों पर है। इनमें से एक अधिकारी आरोपी के घर भी देखे गए थे। माना जा रहा है कि टीम जल्द ही उनसे सवाल-जवाब कर सकती है।

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आरोपी आरती दयाल ने कबूला गुनाह, एसएससी की तैयारी करने आई थी भोपाल

दूसरी ओर भोपाल में एसएससी परीक्षा की तैयारी करने आई हनीट्रैप गैंग की सदस्य आरती दयाल ने पुलिस के सामने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। उसने पुलिस को बताया कि टेंडर लेने का तरीका उसने श्वेता जैन से सीखा था। इसके बाद उसने अपनी गैंग में और लड़कियों को जोड़ा। उसने बिजनेस के सिलसिले में इंदौर नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह से मिलने की बात भी कबूली है।

सरकारी गवाह नहीं बनेगी आरती

पुलिस ने बताया कि वह आरती को अपना गुनाह कबूल करने के बाद सरकारी गवाह नहीं बनाएगी। हालांकि पुलिस ने पहले ही एक छात्रा को सरकारी गवाह बना लिया है। छात्रा को इंदौर की पलासिया  थाना पुलिस अपने साथ लेकर भोपाल लेकर पहुंची है।
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