सार
बालाघाट में 27 बैगा बच्चों की मौत के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। ग्राउंड सर्वे में राशन, साफ पानी, सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली सामने आई। अदालत ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठाए और अगली सुनवाई 18 सितंबर तय की।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बालाघाट के प्रभावित इलाकों में बीमारी के कारण 27 बैगा बच्चों की मौत के मामले में बुधवार को सख्त रुख अपनाया। जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा और तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या प्रशासन 27 बच्चों की मौत के बाद जागा है। उच्च न्यायालय के पूर्व निर्देशों के पालन में तैयार की गई विस्तृत ग्राउंड सर्वे रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष पेश की गई।
ग्राउंड सर्वे में सामने आईं कई अव्यवस्थाएं
याचिकाकर्ता अंशुल तिवारी और उनके वकीलों ने हाईकोर्ट के निर्देश के बाद प्रभावित इलाकों का दौरा कर ग्राउंड सर्वे किया था। अदालत में पेश रिपोर्ट के मुताबिक, कई आदिवासी परिवारों के पास राशन कार्ड तक उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, जिन परिवारों के पास राशन कार्ड हैं, उन्हें राशन में इल्ली लगा चावल दिए जाने का आरोप लगाया गया है। सर्वे में यह भी सामने आया कि प्रभावित इलाकों में रहने वाले बैगा जनजाति के लोगों के लिए पीने के साफ पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से इन अव्यवस्थाओं से जुड़े वीडियो साक्ष्य भी अदालत के सामने पेश किए गए।
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सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली भी उजागर
ग्राउंड सर्वे रिपोर्ट में प्रभावित क्षेत्रों की जर्जर सड़कों और बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं का भी उल्लेख किया गया है। सर्वे के दौरान खस्ताहाल सड़कों और अस्पतालों की स्थिति के वीडियो रिकॉर्ड किए गए, जिन्हें साक्ष्य के तौर पर हाईकोर्ट में पेश किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत जवाब मांगा है।
सरकार ने कहा- जागरूकता अभियान और घर-घर स्क्रीनिंग जारी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वकीलों ने बताया कि बालाघाट के प्रभावित इलाकों में लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग भी कर रही हैं। सरकार की दलील पर हाईकोर्ट ने प्रशासनिक तैयारियों और कार्रवाई पर सवाल उठाए। अदालत ने याचिकाकर्ता के वकीलों को निर्देश दिए कि ग्राउंड सर्वे में सामने आए नए तथ्यों और साक्ष्यों को मुख्य याचिका में शामिल किया जाए। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई
18 सितंबर को होगी।