स्थानीय रिपोर्टर और पत्रकारों के साथ जैसे-जैसे आगे बढ़ना हुआ कहीं किसी का कटा हाथ पड़ा था तो कहीं किसी के पैर का पंजा।
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विस्फोटों से भरी आग बेकाबू होती रही
विकराल होती आग लगातार विस्फोटों को बढ़ा रही थी। पटाखों से भरे गोदाम धूं-धूं करते दावानल में बदल रहे थे, जबकि बारूद फटता चला जा रहा था। धमाके इतने भीषण और भयानक थे कि आसपास के मकानों के टीन, दुकानों की शटर उखड़ गईं। पास खड़ी बाइक और कारें उछल-उछलकर तकरीबन सौ फीट दूर तक गिरीं। लोहे के सरिए, मोटे-मोटे लोहे के टुकड़े हवा में उडते राह चलते, वाहनों से गुजरते लोगों पर गिरे और उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। जिस पटाखा फैक्ट्री में आग लगी वह पूरी तरह ढह गई, जबकि उससे सटी सभी दुकानें तहस-नहस हो गईं। धमाके इतने भयंकर थे कि दो किलोमीटर तक छत और सरिए उड़ गए जबकि पिलर के पिलर जगहों से उखड़कर उछल गए।
कहीं था पैर का पंजा तो कहीं पड़े थे हाथ, लाशों का ढका चादरों से
स्थानीय रिपोर्टर और पत्रकारों के साथ जैसे-जैसे आगे बढ़ना हुआ कहीं किसी का कटा हाथ पड़ा था तो कहीं किसी के पैर का पंजा। लोग दूर उछलकर गिरे लोगों की लाशों को चादर से ढकते नजर आए। संभावना है कि आसपास के इलाकों में घायल और मृतक आग फैलते-फैलते आसपास के तकरीबन सौ घरों को चपेट में ले चुकी थी, जले हुए और गंभीर रूप से घायलों को पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस कम पड़ रही थी।
अस्पताल का मंजर भयावह था। अफरा-तफरी में पहुंचते घायलों की हालत इतनी गंभीर थी कि किसी का सिर, किसी का पैर, किसी का हाथ तो कोई आधा जली अवस्था में इंदौर और भोपाल रेफर किया गया। दर्द से कराहते, रोते-बिलखते और चीखते लोग अस्पताल में बदहवास से थे।
जहां जिंदगी ही हादसा नजर आई वहां मौत की वजह वैध कैसी होगी..!
हरदा जैसे शांत शहर में इतने भीषण हादसे का होना दरअसल बीते छिटपुट घटनाओं को नजरअंदाज किए जाने की बड़ी वजह है। अवैध फैक्ट्री, सघन बस्ती क्षेत्र में बारूद का काम और स्थानीय प्रशासन द्वारा नियमों की अनदेखी ने ऐसी घटनाओं को जन्म दिया है। स्थानीय लोग पूर्व में भी ऐसे हादसों के होने का जिक्र करते हैं। ज्यादा दूर ना जाएं तो 2018 में भी पटाखा फैक्ट्री में आग लगी थी जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई थी। ऐसे में प्रशासन ने कार्रवाई क्यों नहीं की? जब शहर फैल रहा है, लगातार आबादी बढ़ रही है तो फिर एक शहर के नजदीक पटाखा फैक्ट्री चलाने की परमिशन क्यों दी जा रही है? ऐसे कई सवाल हैं जो इस हादसे के बाद सरकार के सामने होंगे।
सवाल यह है कि क्या कार्रवाई होगी?