निर्वाचन आयोग इस बार सिर्फ शांतिपूर्ण चुनाव ही नहीं कराएगा बल्कि मतदाताओं को कुछ संदेश भी देगा। महिला सशक्तिकरण के अलावा आपको दिव्यांग लोगों का जज्बा भी चुनाव के दौरान देखने को मिलेगा। इसी बात को ध्यान में रखते हुए कुछ विधानसभा क्षेत्रों में एक मतदान केंद्र चलाने का जिम्मा दिव्यांग अधिकारियों द्वारा संचालित करने का निर्णय लिया है। यह कदम मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान उठाए जाने के ज्यादा संकेत मिल रहे हैं।
इसी संबंध में चुनाव आयोग ने स्थानीय अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं और इसकी तैयारियां भी शुरू करने के लिए कहा है। अब दिव्यांग अधिकारियों की सूची तैयार की जा रही है और उनकी प्रतिभा के अनुसार उन्हें जिम्मेदारी का वितरण किया जाएगा। दिव्यांगों के यह केंद्र कौन से विधानसभा क्षेत्र में होंगे इस पर निर्णय होना अभी बाकी है। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि इनके लिए ऐसे क्षेत्रों का चुनाव हो जहां किसी प्रकार की परेशानी का सामना इन्हें न करना पड़े।
इसमें दिव्यांगता प्रतिशत को दृष्टिगत रखते हुए अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके साथ ही इस प्रकार के मतदान केंद्र के नाम घोषित करने के पहले यहां चुनाव अधिकारियों को एक दौरा कराया जाएगा जो इस बात का निर्णय करेगा कि यह केंद्र दिव्यांग अधिकारियों के लिहाज से कितना सही है। जब चुनाव अधिकारी यहां कि तैयारियों और परिस्थितियों से संतुष्ट होंगे तो इनके मतदान केंद्रों के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी।
इससे पहले चुनाव आयोग ने महिला सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए और चुनावों में महिला भागेदारी को बढ़ाने के लिए पिंक मतदान केंद्र भी बनाने का फैसला किया है। इस प्रकार के मतदान केंद्र में सिर्फ महिला अधिकारी ही कार्यरत रहेंगी। चुनाव आयोग इस बात की पूरी कोशिश में लगा हुआ कि मतदान लोगों के लिए प्रेरणादायक बनाया जाए।