भोपाल के हमीदिया हॉस्पिटल परिसर में स्थित कमला नेहरू अस्पताल में लगी आग का मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में पहुंच गया है। जबलपुर में दाखिल याचिका में लापरवाही को मुद्दा बनाया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि 2014 में सतना के सरकारी अस्पताल में आग लगी थी। तब 14 बच्चों की मौत हुई थी। इन सात साल में व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आया है।
मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे का कहना है कि उनकी याचिका में बच्चों की मौत से जुड़ा संवेदनशील और सार्वजनिक हित के मुद्दे उठाए गए हैं। इससे पहले भी इस तरह के मुद्दे पर याचिका दाखिल हो चुकी है। तब हाईकोर्ट ने जांच के निर्देश दिए थे और पता चला था कि अस्पतालों में आगजनी रोकने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। भोपाल के मामले में भी यही समस्या सामने आई है। हमीदिया अस्पताल परिसर में लगी आग को रोकने के न तो इंतजाम किए गए थे और न ही फायर सेफ्टी को कभी गंभीरता से लिया गया था। नाजपांडे का कहना है कि हमीदिया अस्पताल में भी लापरवाही की गई है। सात साल बाद में भी अस्पतालों के हालात नहीं बदले हैं। न ही सुरक्षा के इंतजाम हैं और न ही उनका पालन होता है। मंच ने तत्काल आधार पर याचिका की सुनवाई का अनुरोध किया है।
भोपाल के हमीदिया हॉस्पिटल परिसर में स्थित कमला नेहरू अस्पताल में 8 नवंबर को एसएनसीयू में आग लग गई थी। हादसे में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पांच लोगों की मौत हुई है। सूत्र तो 10 से अधिक बच्चों की मौत का दावा कर रहे हैं। मध्यप्रदेश के सभी अस्पतालों का 30 नवंबर तक फायर सेफ्टी ऑडिट करने के निर्देश दिए गए हैं।