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MP: ऑडियो वायरल होने के बाद GRMC और यूनिवर्सिटी आमने-सामने, बिना परीक्षा थमा दी थी एमबीबीएस की डिग्री

Tue, 21 Apr 2026 03:57 PM IST
ग्वालियर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर

सार

ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) और जीवाजी यूनिवर्सिटी में व्यापमं घोटाले के बर्खास्त छात्रों को मोटी रकम लेकर बिना परीक्षा एमबीबीएस की डिग्रियां देने का बड़ा मामला सामने आया है। एक वायरल ऑडियो में कॉलेज के छात्र शाखा प्रभारी द्वारा 16-16 लाख रुपये में डिग्री का सौदा करने की बात उजागर हुई है।
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जीवाजी यूनिवर्सिटी में हुआ बड़ा घोटाला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्यप्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं फर्जीवाड़े की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि ग्वालियर से एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां व्यापमं कांड में बर्खास्त किए गए छात्रों को कथित तौर पर 16-16 लाख रुपये लेकर बिना परीक्षा दिए ही MBBS की डिग्रियां बांटने का बड़ा खुलासा हुआ है। इस गंभीर मामले के उजागर होने के बाद अब गजराराजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) और जीवाजी यूनिवर्सिटी प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए एक-दूसरे के पाले में गेंद फेंक रहे हैं।

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एक ऑडियो ने खोला राज, डीन ने प्रभारी को हटाया
इस पूरे घोटाले की शुरुआत तब हुई जब जीवाजी यूनिवर्सिटी से संबंधित GRMC की छात्र शाखा (UG) के प्रभारी प्रशांत चतुर्वेदी का एक ऑडियो वायरल हुआ। इस ऑडियो में वह बर्खास्त छात्रों को बिना एग्जाम दिए 16-16 लाख रुपये में डिग्री दिलाने की बात करते सुनाई दे रहे थे। मामला गरमाते ही मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. आर.के.एस. धाकड़ ने आनन-फानन में प्रशांत चतुर्वेदी को पद से हटाकर दूसरी जगह भेज दिया। हालांकि, कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि डिग्री देने का काम यूनिवर्सिटी का है, उनका नहीं।

यूनिवर्सिटी और कॉलेज के बीच 'तू-तू मैं-मैं'
गजराराजा मेडिकल कॉलेज जहां यूनिवर्सिटी की ओर इशारा कर रहा है, वहीं जीवाजी यूनिवर्सिटी के कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कुलगुरु का दावा है कि यूनिवर्सिटी की ओर से ऐसी कोई डिग्री जारी नहीं की गई है और शिकायतकर्ता को मांगी गई जानकारी RTI के तहत दे दी गई है। उन्होंने साफ कहा कि इस विवाद से यूनिवर्सिटी का कोई लेना-देना नहीं है।
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CBI जांच और हाईकोर्ट जाने की तैयारी
व्यापमं कांड के बर्खास्त छात्र और इस मामले को उजागर करने वाले संदीप लहरिया ने आरोप लगाया है कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी मिलकर इस बड़े घोटाले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। लहरिया का कहना है कि उन्होंने जो जानकारी मांगी थी, वह उन्हें अब तक नहीं दी गई है। अब वे इस मामले को हाईकोर्ट में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं और इसमें CBI को भी पक्षकार (पार्टी) बनाएंगे।

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रिकॉर्ड गायब, उठे कई गंभीर सवाल

गौरतलब है कि व्यापमं कांड में करीब 150 छात्रों पर FIR हुई थी, जिनमें से 30 से ज्यादा छात्र बर्खास्त हुए थे। अब सवाल उठ रहे हैं कि:

  • अगर इन छात्रों को डिग्री मिली, तो उन्होंने परीक्षा कब और कहां दी?
  • क्या उस समय की उनकी लोकेशन या परीक्षा केंद्रों के CCTV फुटेज की जांच की गई?
  • सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि आखिर GRMC और यूनिवर्सिटी के पास इन छात्रों का रिकॉर्ड क्यों उपलब्ध नहीं है?

अधिकारियों की खींचतान और दस्तावेजों की गैरमौजूदगी ने इस शक को पुख्ता कर दिया है कि यह घोटाला काफी गहरा है और इसके तार कई बड़े अधिकारियों से जुड़े हो सकते हैं।

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