श्योपुर में कुपोषित बच्ची की मौत के बाद उसका शव उसके घर पहुंचाया गया।
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मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में कुपोषण से बच्ची की मौत का मामला सामने आया है। डेढ़ साल की बच्ची का वजन नहीं बढ़ रहा था। जिम्मेदार अधिकारी दावे कर रहे हैं कि प्रदेश में कुपोषण काबू में है। बच्चों के लिए कई काम किए जा रहे हैं। वहीं, श्योपुर में डेढ़ साल की बच्ची की असामयिक मौत ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कम्प मचा दिया है।
मामला श्योपुर जिला अस्पताल के एनआरसी केंद्र का है। यहां चार दिन पहले भर्ती कराई गई डेढ़ साल की मासूम बालिका देवकी आदिवासी की शुक्रवार सुबह मौत हो गई। इस कुपोषित बच्ची की मौत को छिपाने जिम्मेदारों ने अलसुबह किसी को भनक लगे बगैर बच्ची के शव को वाहन से उसके गांव पहुंचा दिया। बताया गया कि देवकी का वजन 10 किलो होना चाहिए था, लेकिन कुपोषण की वजह से उसका वजन चार किलो से भी कम था।
8 अगस्त को किया था भर्ती
कुपोषित बच्ची देवकी को उपचार और पोषण के लिए आठ अगस्त को जिला अस्पताल के एनआरसी केंद्र में भर्ती कराया गया था। कुपोषण की वजह से बच्ची की हालत ज्यादा नाजुक हो गई थी इस वजह से शुक्रवार सुबह उसकी मौत हो गई। मृतक बच्ची के परिजनों का कहना है कि बच्ची पिछले तीन-चार दिन से जिला अस्पताल के एनआरसी में भर्ती थी। वह कुपोषित थी।
बच्ची को शुरुआत से वृद्धि को लेकर दिक्कत थी
श्योपुर जिले के सीएमएचओ डॉ बीएल यादव का कहना है कि बच्ची अंडरवेट थी। इस बात से कोई इनकार नहीं है, लेकिन जब हमने उसके माता-पिता से बात की तो पता चला कि देवकी को वृद्धि से जुड़ी कोई समस्या थी। जन्म के काफी देर बाद वह रोई थी। इतना ही नहीं वह खाना भी नहीं खा पा रही थी। देवकी से पहले उसकी मां को दो बच्चे हुए थे और दोनों पूरी तरह स्वस्थ है। देवकी में किसी कारण से वृद्धि संबंधित समस्या थी और ऐसा लगता है कि सेरेब्रल पाल्सी जैसी कोई दिक्कत थी, जिसकी वजह से वजन नहीं बढ़ रहा था।
श्योपुर में नहीं है कुपोषण का पहला मामला
श्योपुर जिले में पिछले साल तक 20 हजार से अधिक बच्चे कुपोषित थे। इनमें करीब चार हजार बच्चे अति-कुपोषित की श्रेणी में आते हैं। अब महिला एवं बाल विकास विभाग ने नए आंकड़े पेश कर जिले से कुपोषण को लगभग गायब कर दिया है। डेढ़ साल की मासूम की मौत ने महिला बाल विकास विभाग के दावों के साथ-साथ उनके आंकड़ेबाजी की भी पोल खोलकर रख दी है। अब देखना होगा कि कुपोषण से ग्रसित बच्ची की मौत के मामले में जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी?