MP Election 2023: 1947 में देश आजाद होने के बाद ग्वालियर रियासत की महारानी राजमाता विजयाराजे सिंधिया कांग्रेस में शामिल हो गई और फिर वह विधायक बन गई। इसके बाद ग्वालियर चंबल संभाग की राजनीति में कांग्रेस में उनका दखल बढ़ गया।
राजमाता ने जनसंघ के साथ मिलकर किया था नई सरकार का गठन
1947 में देश आजाद होने के बाद ग्वालियर रियासत की महारानी राजमाता विजयाराजे सिंधिया कांग्रेस में शामिल हो गई और फिर वह विधायक बन गई। इसके बाद ग्वालियर चंबल संभाग की राजनीति में कांग्रेस में उनका दखल बढ़ गया, लेकिन 1967 में उनके तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारका प्रसाद मिश्र से विवाद हो गया और राजमाता ने अपने समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस छोड़ दी। इसके कारण द्वारका प्रसाद मिश्र की सरकार अल्पमत में आ गई और कांग्रेस की सरकार गिर गई। राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने जनसंघ के साथ मिलकर नई सरकार का गठन किया। यह देश की संभवत पहली गैर कांग्रेसी सरकार थी। गोविंद नारायण सिंह इस सरकार के मुख्यमंत्री बनाए गए, हालांकि यह सरकार ज्यादा दिन नहीं चली और अगले मुख्य चुनाव में जनसंघ की करारी हार हुई और फिर कांग्रेस की वापसी हो गई, लेकिन राजमाता विजयराजे सिंधिया फिर कांग्रेस में वापस नहीं लौटी और वह स्थाई रूप से जनसंघ बनी रहीं। वह जनसंघ के एक महत्वपूर्ण पिलर के रूप में स्थापित हो गई।