ग्वालियर क्राइम ब्रांच की टीम ने ऑनलाइन सट्टेबाजी और साइबर ठगी के जरिये प्रतिदिन लाखों रुपये का अवैध कारोबार संचालित करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरवाई स्थित सांवरिया धाम फेस-1 में किराए के मकान पर छापा मारकर चार युवकों को पकड़ा है।
यह गिरोह fairplay-1.com वेबसाइट के माध्यम से लोगों को ऑनलाइन गेम खिलाकर ठगी और सट्टेबाजी का अवैध धंधा चला रहा था। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से ऑनलाइन नेटवर्क से जुड़े बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। पकड़े गए आरोपी लैपटॉप और टैबलेट की मदद से सट्टेबाजी और वित्तीय धोखाधड़ी का नेटवर्क चला रहे थे।
पुलिस को मुखबिर के जरिये सूचना प्राप्त हुई थी कि सांवरिया धाम में नरेंद्र सिंह चौहान के मकान की ऊपरी मंजिल पर साइबर ठगी और फर्जी म्यूल बैंक खाते खरीदने-बेचने का काम चल रहा है। इस सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने संबंधित मकान पर तत्काल दबिश दी। कमरे के अंदर चार युवक लैपटॉप और टैबलेट पर काम करते हुए पाए गए, जिन्हें पुलिस ने मौके से ही हिरासत में ले लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान झांसी के सीपरी बाजार निवासी 19 वर्षीय राजा रायकवार, दतिया के ग्राम घुघसी निवासी 20 वर्षीय नीलेश रावत, शिवपुरी के करैरा अंतर्गत ग्राम सड़ निवासी 18 वर्षीय पंकज पाल और शिवपुरी के सीहोर अंतर्गत ग्राम धमधौली निवासी 19 वर्षीय रानू रावत के रूप में हुई है।
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फर्जी बैंक खातों से रोजाना लाखों रुपये का लेन-देन
पुलिस की पूछताछ में आरोपी राजा रायकवार ने गिरोह की कार्यप्रणाली के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उसने बताया कि वे fairplay-1.com वेबसाइट पर ऑनलाइन राशि जमा करने और निकासी की प्रक्रिया को संभालते थे। गिरोह के सदस्य व्हाट्सएप के माध्यम से कमीशन पर खरीदे गए फर्जी म्यूल बैंक खातों के विवरण प्राप्त करते थे। ऑनलाइन सट्टेबाजी और साइबर ठगी से अर्जित पूरी अवैध राशि इन्हीं खातों में हस्तांतरित कराई जाती थी।
बैंक खाते बंद होने या फ्रीज होने की संभावना को देखते हुए दो से तीन दिनों के भीतर पूरी रकम निकाल ली जाती थी। जांच अधिकारी के अनुसार, यह गिरोह प्रतिदिन लगभग 12 लाख से 15 लाख रुपये का अवैध लेनदेन कर रहा था। आरोपी बेहद संगठित तरीके से तकनीक का दुरुपयोग करके लोगों को वित्तीय नुकसान पहुंचा रहे थे।
दिल्ली से चल रहा था सट्टेबाजी का पूरा संजाल
विस्तृत जांच में सामने आया कि इस पूरे गिरोह का मुख्य सरगना मकान मालिक का बेटा उदय सिंह चौहान और उसका साथी संजय रावत हैं। आरोपी उदय सिंह चौहान लगभग तीन महीने पहले अपनी पत्नी के साथ दिल्ली चला गया था। वह दिल्ली में रहकर ही एटीएम के माध्यम से म्यूल बैंक खातों में जमा अवैध राशि की निकासी करता था।
दूसरा सरगना संजय रावत फर्जी सिम कार्ड और कमीशन के आधार पर म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम देखता था। इन दोनों मुख्य सरगनाओं ने राजा रायकवार को 20 हजार रुपये प्रति महीने के वेतन पर काम करने के लिए रखा था। वहीं अन्य तीन युवकों नीलेश रावत, पंकज पाल और रानू रावत को काम सिखाने के उद्देश्य से हाल ही में बुलाया गया था। दोनों सरगनाओं को हर सात दिनों में लगभग चार लाख से पांच लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा प्राप्त होता था।
आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई और फरार सरगनाओं की तलाश
पुलिस ने चारों आरोपियों के विरुद्ध सार्वजनिक द्यूत अधिनियम की धारा 4ए के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की धारा 66सी और 66डी के अंतर्गत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस ने मौके से साइबर अपराध में प्रयुक्त लैपटॉप और टैबलेट को भी जब्त कर लिया है।
पुलिस की अलग-अलग टीमें फरार चल रहे मुख्य सरगना उदय सिंह चौहान और संजय रावत की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपियों के पकड़े जाने के बाद नेटवर्क से जुड़े अन्य बड़े चेहरों और अंतरराज्यीय संपर्कों के विषय में नए तथ्य उजागर होने की पूरी संभावना है।