ग्वालियर की साइबर पुलिस ने एक अपराधी को अनोखे तरीके से गिरफ्तार किया है। साइबर पुलिस ने बराती बनकर हरियाणा के मेवात से इस साइबर ठग को गिरफ्तार किया है। ठग ने रिटायर्ड टीचर के अकाउंट से इंटरनेट बैंकिंग के जरिए 6 लाख से अधिक रुपए निकाले थे। इसके बाद रिटायर्ड टीचर ने साइबर पुलिस में शिकायत की थी। उसके बाद साइबर पुलिस लगातार इसकी जांच कर रही थी।
दरअसल, मुरैना जिले की रहने वाले तहसीलदार सिंह तोमर माध्यमिक विद्यालय में टीचर थे। नवंबर 2021 को वह पासबुक की एंट्री करवाने बैंक गए थे। जब उन्होंने अपने बैंक अकाउंट का स्टेटस चेक किया तो उनके होश उड़ गए। उनके अकाउंट में सिर्फ 200 रुपये थे। उसके बाद जब उन्होंने अपने अकाउंट को चेक किया तो अकाउंट से 6.23 लाख रुपये इंटरनेट बैंकिंग के जरिए निकाले गए थे। उसके बाद पता लगा कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है।
आरोपी ने कैसे किया यह फ्रॉड
मुरैना जिले के रिटायर्ड बुजुर्ग टीचर ने अपने पेंशन अकाउंट से जो मोबाइल नंबर लिंक करवाया था, उसका उपयोग करना बंद कर दिया था। दो साल बाद इस नंबर को कंपनी ने किसी दूसरे को अलॉट कर दिया। उसके बाद रिटायर्ड बुजुर्ग टीचर की जो सैलरी आती थी, उसका मैसेज बैंक की ओर से उसी नंबर पर किसी दूसरे व्यक्ति के पास जाता रहा। जिस नए कस्टमर के नाम पर रिटायर्ड टीचर के नंबर की सिम जारी हुई थी, उसने नेट बैंकिंग करवा लिया। बैंक इसके लिए ओटीपी भेजता है। पासवर्ड इसी नंबर पर आया और कस्टमर ने इसे कंफर्म कर दिया। इसके बाद आरोपी ने रिटायर्ड टीचर का अकाउंट खाली कर दिया। इसकी शिकायत रिटायर्ड टीचर तहसीलदार सिंह तोमर ने साइबर क्राइम सेल को की थी।
पुलिस बराती बनकर तलाशती रही ठग को
राज्य साइबर सेल के पुलिस अधीक्षक सुधीर अग्रवाल ने बताया कि जांच में पता चला कि जिस सिम से नेट बैंकिंग एक्टिव की गई, उसे गुना से खरीदा गया। टीम ने गुना जाकर पूछताछ की। तीन लोगों को पकड़ा। पता चला कि उन्होंने मेवात, हरियाणा निवासी दिलशाद खान के नाम सिम जारी की है। राज्य साइबर सेल की टीम ने आरोपियों से पूछताछ में पाया कि मुख्य आरोपी दिलशाद ही है और वह हरियाणा के मेवात का रहने वाला है। इसके बाद पुलिस टीम दो दिन तक बराती बनकर घूमती रही और उस शादी में भाग लेने दिलशाद भी आया हुआ था। गांव से बाहर निकलते ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और ग्वालियर ले आए।