करीब डेढ़ दशक से सिंधिया राजपरिवार की संपत्तियों को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही है। यह विवाद सिर्फ ग्वालियर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दिल्ली, मुंबई और पुणे की अदालतों तक पहुंचा। अब दोनों पक्षों ने समझौते का रास्ता चुना है और ग्वालियर जिला न्यायालय में समझौता आवेदन भी प्रस्तुत किया जा चुका है।
करीब 40 हजार करोड़ की संपत्ति
एक दर्जन से ज्यादा मुकदमे
ग्वालियर, दिल्ली, मुंबई और पुणे की अदालतों में सुनवाई
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जय विलास पैलेस, ग्वालियर
उषा किरण पैलेस
माधव पैलेस, शिवपुरी
दिल्ली, मुंबई और पुणे की संपत्तियां
सर जयाजीराव ट्रस्ट
कृष्ण माधव ट्रस्ट
बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच करीब 40 पन्नों का समझौता तैयार किया गया है। प्रस्तावित फॉर्मूले के अनुसार, जो पक्ष जिस संपत्ति पर वर्तमान में काबिज है, वही संपत्ति उसके पास रहेगी। यानी मौजूदा कब्जे को ही मालिकाना हक का आधार माना जाएगा। हालांकि इस फॉर्मूले पर अदालत की अंतिम मंजूरी अभी बाकी है।
सिंधिया राजपरिवार के करीब 40 हजार करोड़ रुपये के संपत्ति विवाद में बुधवार को अंतिम फैसला नहीं हो सका। ग्वालियर जिला न्यायालय में समझौते पर कानूनी मुहर लगने की उम्मीद थी, लेकिन सुनवाई आगे बढ़ गई।