मध्यप्रदेश के सिवनी में कोरोना की अहम दवा रेमडेसिविर की कालाबाजारी करने का मामला सामने आया है। इस मामले में मुख्य आरोपी कमलेश्वर प्रसाद दीक्षित को ग्वालियर स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी के पास से रेमडेिसिविर के पांच इंजेक्शन मिले, जिनकी वो सोशल मीडिया के माध्यम से कालाबाजारी करता था।
विधायक का चुनाव लड़ चुका है आरोपी
जब इस रैकेट के बारे में पता चला तो एसटीएफ की टीम ने एक मरीज का भाई बनकर उसे पकड़ा और उसके पास से रेमडेसिविर इंजेक्शन अपने कब्जे में लिए। बता दें कि आरोपी वैसे तो पेशे से वकील है लेकिन 2018 में सिवनी विधानसभा सीट से विधायक का चुनाव भी लड़ चुका है।
कोरोना काल के दौरान रेमडेसिविर दवा की कालाबाजारी बहुत ज्यादा हो रही है। असली इंजेक्शन के साथ-साथ नकली इंजेक्शन की भी कालाबाजारी की जा रही है। इस दौरान कई रैकेट सक्रिय हैं। इन्हें पकड़ने के लिए एसटीएफ की टीम वेश बदलकर इन लोगों को पकड़ रही हैं। आरोपी कमलेश्वर प्रसाद के खिलाफ धोखाधड़ी, आवश्यक वस्तु अधिनियम और महामारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
ऐसे मिली आरोपी की जानकारी
एसटीएफ इंस्पेक्टर चेतन सिंह बैस को सूचना मिली कि कुछ लोग सोशल मीडिया के माध्यम से रैकेट चला रहे हैं। ऐसे में एसटीएफ की टीम ने फेसबुक पर एक नया अकाउंट बनाया और मरीज का भाई बनकर आरोपी के रेमडेसिविर की मांग रखी। जिस दिन पोस्ट किया, उसी दिन एक युवक ने मैसेज किया।
इसके बाद बातचीत में एसटीएफ की टीम ने पांच इंजेक्शनों की मांग रखी और तत्काल लाने को कहा। एजेंट ने तीस हजार रुपये में एक इंजेक्शन देने की बात कही और डील पक्की हो गई। इसके बाद शनिवार को आरोपी कांगो एक्सप्रेस पकड़कर ग्वालियर पहुंचा। ग्वालियर स्टेशन पहुंचते ही एसटीएफ की टीम ने आरोपी को पकड़ लिया और उसके बैग में से पांच इंजेक्शन बरामद किए।
विधायक बनना चाहता था आरोपी
आरोपी कमलेश्वर प्रसाद को लेकर एसटीएफ का कहना है कि वो कभी विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बनना चाहता था और 2018 में वो चुनाव लड़ा भी था। लेकिन उसे सिर्फ 832 वोट मिले थे। आरोपी पेशे से वकील है और सिवनी में उसका अपना कंप्यूटर इंस्टीट्यूट भी है।