प्रतिमा देवी राना ने लगाई आपत्ति
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प्रतिमा देवी का आरोप है कि उनसे धोखाधड़ी करके समझौता प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कराए गए। उन्होंने अदालत में आवेदन देकर मामले की सुनवाई में दोबारा शामिल होने और समझौते में अपना अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की है।
प्रतिमा देवी की आपत्ति पर उनकी तीनों मौसियों वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे की ओर से अदालत में जवाब पेश किया गया है। उनका कहना है कि समझौता प्रस्ताव पर हस्ताक्षर आपसी सहमति से किए गए थे। उनकी ओर से यह भी कहा गया कि हस्ताक्षर के बाद परिवार के सदस्य वहां रुके, साथ में पारिवारिक भोज हुआ और तस्वीरें भी खिंचवाई गईं। वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से भी समझौते में किसी तरह की गड़बड़ी से इनकार करते हुए हस्ताक्षर सहमति से होने की बात कही गई है।
आज अदालत में होगी सुनवाई
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इस विवाद में दिवंगत पद्मावती राजे की बेटियों कनिका देवी सिंह और प्रतिमा देवी राना की भूमिका महत्वपूर्ण है। मूल मुकदमे में दोनों को पक्षकार बनाया गया था लेकिन सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं होने के कारण अदालत ने उन्हें एकपक्षीय यानी एक्स पार्टी घोषित कर दिया था।अब प्रतिमा देवी ने दोबारा कार्रवाई में शामिल होने की मांग की है। चूंकि पद्मावती राजे भी संपत्ति में हिस्सेदार थीं, इसलिए उनकी बेटियों के अधिकार और समझौते पर उठाई गई आपत्ति मामले को कानूनी रूप से पेचीदा बना रही है।
सिंधिया राजघराने की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े इस ऐतिहासिक विवाद में 78 साल पुराना विलय पत्र, जिसे 'द कोवेनेंट' कहा जाता है, महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है।अब अदालत की सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं। अदालत यह तय करेगी कि अंतरिम आवेदनों पर आगे सुनवाई होगी या प्रतिमा देवी की आपत्ति स्वीकार कर साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। इस फैसले से 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े विवाद की आगे की कानूनी प्रक्रिया की दिशा तय होने की संभावना है।