विदेश में मेडिकल की पढ़ाई कर डॉक्टर बनने का सपना लेकर रूस गए राघौगढ़ के छात्र सूरज सैनी का असमय निधन उनके परिवार के लिए गहरा सदमा बन गया है। जिस बेटे को परिवार ने बेहतर भविष्य की उम्मीदों के साथ विदेश भेजा था, उसकी मौत की खबर ने घर में मातम पसरा दिया। अब सूरज का पार्थिव शरीर दिल्ली पहुंच चुका है और उसे अंतिम संस्कार के लिए गृह नगर राघौगढ़ लाया जा रहा है।
सूरज रूस में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे थे। जानकारी के मुताबिक, कुछ दिन पहले उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। इसके बाद उनके उपचार की व्यवस्था की गई, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। बताया गया है कि दो दिन पहले हार्ट अटैक के कारण उनका निधन हो गया। विदेश में बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
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सूरज के निधन के बाद सबसे बड़ी चिंता उनके पार्थिव शरीर को भारत लाने की थी। विदेश में हुई इस दुखद घटना के बीच परिवार अपने बेटे को अंतिम बार देखने और अपने गृह नगर में अंतिम संस्कार करने की आस लगाए बैठा था। इसी सिलसिले में परिजनों ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से सहायता मांगी थी। उस दौरान सिंधिया अशोकनगर के दौरे पर थे। परिवार ने अपनी परेशानी उनके सामने रखकर सूरज के पार्थिव शरीर को भारत लाने में सहयोग का आग्रह किया था। सिंधिया के प्रयासों से पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, ताकि परिवार अपने बेटे का अंतिम संस्कार कर सके।
दिल्ली पहुंचा शव
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सूरज सैनी का पार्थिव शरीर मास्को से दिल्ली पहुंच गया है। इसके बाद गुना जिला प्रशासन ने एंबुलेंस के माध्यम से उसे राघौगढ़ तक पहुंचाने की व्यवस्था की। पार्थिव शरीर को सड़क मार्ग से गृह नगर लाया जा रहा है। शुक्रवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा।
पिता नगर पालिका में पदस्थ
सूरज सैनी राघौगढ़ निवासी राजकुमार सैनी के बेटे थे। उनके पिता राघौगढ़ नगरपालिका में पदस्थ हैं, जबकि उनकी मां आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। परिवार ने बेटे की शिक्षा और भविष्य के लिए उम्मीदें संजोई थीं। एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे सूरज का लक्ष्य चिकित्सा क्षेत्र में अपना करियर बनाना था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।