गुना जिले के सतनपुर गांव स्थित मुक्तिधाम की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आई है। हाल ही में सर्पदंश से मृत हजरत सिंह अहिरवार के अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जिले के सतनपुर गांव का मुक्तिधाम अब ‘मुक्ति’ से ज्यादा ‘परेशानी’ का प्रतीक बन गया है। हर साल बारिश के मौसम में यहां अंतिम संस्कार करना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। हाल ही में सर्पदंश से हजरत सिंह अहिरवार की मौत के बाद जब परिजन उनका अंतिम संस्कार करने मुक्तिधाम पहुंचे, तो वहां की अव्यवस्थाओं ने उनके दुःख को और गहरा कर दिया।
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मृतक के भाई और पोस्ट मास्टर बाबूलाल अहिरवार ने बताया कि मुक्तिधाम में बारिश से बचने के लिए न कोई टीन शेड है और न ही बैठने की व्यवस्था। ग्रामीणों के अनुसार, पहले यहां टीन शेड लगा हुआ था, लेकिन तेज हवाओं में उड़ जाने के बाद आज तक किसी ने उसे दोबारा लगाने की जहमत नहीं उठाई। बारिश के बीच परिजनों को त्रिपाल लगाकर अंतिम संस्कार करना पड़ा। चिता सुलगाने के लिए सूखी जगह तक नहीं मिल सकी। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि ये समस्या हर साल बारिश में सामने आती है, लेकिन ग्राम पंचायत, सरपंच और सचिव इस पर कोई ध्यान नहीं देते।
“क्या बारिश के मौसम में मरना अब सजा बन गया है?” यही सवाल अब गांव के लोगों के बीच चर्चा का विषय है। ग्रामीणों का कहना है कि अंतिम विदाई जैसे भावुक पल में जब इंसान को भीगकर, संघर्ष कर अपनों को विदा करना पड़े, तो यह सीधा प्रशासनिक और पंचायत स्तर की लापरवाही को उजागर करता है। गांववासियों ने मांग की है कि मुक्तिधाम में शीघ्र टीन शेड और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं बहाल की जाएं, ताकि भविष्य में कोई और परिवार इस तरह की तकलीफ न झेले।