संयुक्त कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के कार्यकर्ता
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गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने बैतूल में अपनी नौ सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। पार्टी के सदस्यों ने मुख्यमंत्री के नाम का नौ सूत्रीय ज्ञापन संयुक्त कलेक्टर को सौंपा। वहीं, प्रदर्शन करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे पार्टी कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं तो पार्टी बड़े स्तर पर आंदोलन करेगी। साथ ही अदालत का दरवाजा भी खटखटाएगी। उन्होंने मंहगाई घटाने के लिए टैक्स शून्य करने की मांग भी की है।
रैली की शक्ल में कलेक्ट्रेट पहुंचे कार्यकर्ताओं ने कई नीतिगत मुद्दों पर सवाल उठाए। उन्होंने संविधान की पांचवीं अनुसूची के विषय पर अपनी बात रखी। वहीं, ग्राम न्यायालय अधिनियम को लागू करने का मुद्दा भी उठाया। पार्टी जिलाध्यक्ष हेमंत सरेयाम और दिलीप पाल के नेतृत्व में पहुंचे गोंडवाना पार्टी कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही उन्होंने दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा और कांग्रेस का भी विरोध किया।
ये हैं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की नौ सूत्रीय मांगें
- भारतीय संविधान के तहत राज्यों को विशेषाधिकार प्रदान किए गए हैं। अनुच्छेद 40 के प्रावधानों के अनुसार राज्य की जो पंचायतें पांचवीं अनुसूची में शामिल नहीं हैं। जैसे जिला बैतूल के जनपद क्षेत्र बैतूल, आमला तथा मुलताई अनुसूचित क्षेत्रों के अंतर्गत नहीं हैं। इन जनपदों की पंचायतों में पेसा एक्ट 2022 का विस्तार किया जाए।
- शासन द्वारा पंचायत उपबंध पेसा एक्ट 2022 की तरह अनुसूचित क्षेत्रों की नगर पालिकाओं, नगर परिषदों में विशेष परिषद के लिए नगर पालिका (अनुसूचति क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम 2001 ड्राफ्ट बनाकर तैयार है। इसके लाभ से प्रदेश सहित नगर पालिका सारणी, नगर परिषद घोड़ाडोंगरी, शाहपुर, चिचौली भैंसदेही तथा आठनेर लाभ से वंचित हैं, को तत्काल प्रभावित किया जाए।
- प्रदेश तथा जिलो में जिन क्षेत्रों को पांचवी अनुसूची के तहत शामिल नहीं किया है। उन जनजाति क्षेत्रों में भारतीय दंड संहिता 1860 का विस्तारीकरण अध्याय-एक की धारा पांच में प्रावधानित स्थानीय विधि के अनुसार किया जाए।
- ग्रामीण अंचलों में न्याय व्यवस्था सरलता से उपलब्ध हो व ग्राम न्यायालय अधिनियम 2008 को धरातल पर पर लागू किया जाए।
- मंहगाई दर कम करने के लिए खाद्य वास्तुओं पर लगने वाले सभी तरह के टैक्स शून्य किए जाएं।
- भूमि स्वामी अंतरण के अधिकार के तहत भूमि का कोई भी विक्रय तब तक विधिमान्य नहीं होना चाहिए, जब तक कम से कम पांच एकड़ सिंचित तथा 10 एकड़ असिंचित भूमि किसी किसान के पास शेष बच जाए।
- प्रदेश के जिलो में व्याप्त युवा बेरोजगारी स्तर कम करने के लिए राजस्व रिकार्ड के अनुसार कदम उठाए जाएं।
- मुख्यालय पर प्रति मंगलवार आयोजित होने वाली जनसुनवाई में शामिल होने वाली जनता को आने-जाने का यात्रा भत्ता तत्काल प्रदान किया जाए।
- रेत प्राकृतिक खनिज है। इसलिए सिर्फ परिवहन शुल्क को लिया जाना न्यायिक रहेगा।