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MP News: उमरिया में फर्जी सीबीआई डिप्टी कमिश्नर को तीन साल का कठोर कारावास, जानें पूरा मामला

Tue, 24 Jan 2023 06:46 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया

सार

अभियुक्त ने फरियादी से फर्जी सीबीआई डिप्टी कमिश्नर बनकर नौकरी लगवाने का झांसा दिया था। इस पर फरियादी ने अभियुक्त से कहा कि आप इतने बडे पद पर हैं, मेरी और मेरे भाई की नौकरी लगवा दीजिए। इसके बाद अभियुक्त ने फरियादी लीलावती एवं उसके भाई शिवम यादव से नौकरी लगवाने के लिए दो लाख से ज्यादा रुपये हड़प लिए थे।
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जिला एवं सत्र न्यायालय, उमरिया (मप्र) - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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उमरिया जिला एवं सत्र न्यायालय ने सीबीआई का डिप्टी कमिश्नर बनकर धोखाधड़ी करने वाले शख्स को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही कोर्ट ने उस पर जुर्माना भी लगाया है। सजा पाने वाले शख्स पर फरियादी लीलावती एवं उसके भाई शिवम यादव से नौकरी लगवाने के लिए लगभग 2,35,000 रुपये हड़पने का दोष सिद्ध हुआ है।

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खुद को सीबीआई डिप्टी कमिश्नर बताकर नर्स से हड़पी मोटी रकम
जिला मीडिया प्रभारी (अभियोजन) एडीपीओ नीरज पाण्डेय ने बताया कि फरियादी लीलावती यादव जिला अस्पताल उमरिया में अस्थाई तौर पर सहायक स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत थी। उसकी जान-पहचान अभियुक्त अनिरुद्ध सिंह परस्ते से फरियादी की ही सहेली शीलू सिंह श्याम ने साल 2020 में कराई थी। अभियुक्त अनिरुद्ध सिंह परस्ते ने लीलावती को बताया कि वह सीबीआई के डिप्टी कमिश्नर के पद पर पदस्थ है। अभियुक्त ने फरियादी से फर्जी सीबीआई डिप्टी कमिश्नर बनकर नौकरी लगवाने का झांसा दिया।

अधिकारी ने बताया कि फरियादी ने अभियुक्त से कहा कि आप इतने बडे पद पर हैं, मेरी और मेरे भाई की नौकरी लगवा दीजिए। इसके बाद अभियुक्त ने फरियादी लीलावती एवं उसके भाई शिवम यादव से नौकरी लगवाने के लिए लगभग 2,35,000 रुपये हड़प लिए। 
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उन्होंने बताया कि इसे लेकर पुलिस थाना कोतवाली उमरिया में अभियुक्त के विरुद्ध अपराध क्रमांक 389/2021 पर भा.दं.सं. की धारा 420 एवं आईटी एक्ट की धारा 66डी के अंतर्गत मामले में दर्ज किया गया। मामले की जांच करने के बाद अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच तत्कालीन टीआई सुन्द्रेश सिंह मेरावी ने की थी। राज्य की ओर से मामले में सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी नीरज पाण्डेय ने सशक्त पैरवी की और आरोपी को कठोर से कठोर दण्ड देने का निवेदन किया।

इस मामले में उमरिया जिला एवं सत्र न्यायालय के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आरपी अहिरवार ने आरोपी अनिरुद्ध सिंह परस्ते को भा.दं.सं. की धारा 420 के अंतर्गत तीन साल के कठोर कारावास और 10,000 रुपये के अर्थदण्ड की सजा सुनाई।

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