मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा कि वो राज्य में अपनी सरकार इसलिए नहीं बचा पाए, क्योंकि पार्टी के कुछ विधायकों ने उन्हें झूठा विश्वास दिया था कि वे उनका साथ नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि स्वयं मुझे और दिग्विजय सिंह को कुछ विधायकों ने झूठा विश्वास दिलाया था कि वह वापस लौट आएंगे। उनके झूठे विश्वास पर हम दोनों ने भरोसा किया और हम अपनी सरकार नहीं बचा पाए।
कमलनाथ ने कहा कि झूठे विश्वास में रहने के कारण भाजपा-सिंधिया गठजोड़ की चालों की पूरी जानकारी होने के बावजूद मार्च में वो अपनी सरकार नहीं बचा सके। ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर उन्होंने कहा कि वो लोकसभा में मिली हार से खुद को संभाल नहीं पाए, इसके बाद से ही वो भाजपा के संपर्क में थे। भाजपा की राज्य इकाई ने उन्हें कभी नहीं चाहा, लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने राज्यसभा की सीट के लिए उन्हें शामिल कर लिया।
मध्यप्रदेश उपचुनाव में कांग्रेस की वापसी की संभावनाओं पर कमलनाथ ने कहा कि अभी हमारे पास 92 और उनके पास 107 विधायक हैं। 24 सीटों पर उपचुनाव होने हैं, इसलिए हमें उनमें से कम से कम 15 सीटें भाजपा के बराबर आने के लिए जीतनी होंगी। यह आंकड़ों का खेल है।
सिंधिया समर्थक 22 विधायकों के इस्तीफे के चलते कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई थी। 20 मार्च को कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 23 मार्च को शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में चौथी बार शपथ ली थी।