किसानों ने शासन से 2015 में कलेक्टर द्वारा तय की गई प्रति टावर 12 लाख रुपए, तार का तीन हजार रुपए प्रति मीटर की दर से मुआवजा देने की मांग की। किसानों ने कहा कि हम कंपनी से भीख नहीं मांग रहे हैं, जमीन के बदले मुआवजा हमारा अधिकार है। अगर पावर ग्रिड मुआवजा नहीं देती तो अब हम आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।
उचेहरा के 300 किसानों ने सोमवार को सतना पावर ग्रिड एवं जिला प्रशासन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर कलेक्ट्रेट का घेराव किया। दरअसल, सतना पावर ग्रिड ने उचेहरा इलाके में किसानों की जमीनों में हाईटेंशन लाइनों का जाल तो बिछा दिया, लेकिन मुआवजा नहीं दिया। पावर ग्रिड की इस मनमानी के खिलाफ इलाके के 40 से अधिक किसान दो महीने से टावर पर चढ़कर आंदोलन कर रहे हैं।
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मुआवजा दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने प्रभावित किसानों की जमीनों का सर्वे कराते हुए 2017 की गाइडलाइन के अनुसार किसानों को जमीन का मुआवजा देने के लिए प्रदेश सरकार से 27 करोड़ का बजट मांगा है। लेकिन किसानों ने नई गाइडलाइन के अनुसार मुआवजा लेने से मना कर दिया है।
'जमीन के बदले मुआवजा हमारा अधिकार है'
जिला प्रशासन द्वारा सरकार को भेजी गई रिपोर्ट के विरोध में सोमवार को उचेहरा के 300 किसानों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया। इस दौरान उन्होंने पावर कंपनी एवं जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसान हाथों में अपनी मांगों की तख्तियां लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे।
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किसानों ने शासन से 2015 में कलेक्टर द्वारा तय की गई प्रति टावर 12 लाख रुपए, तार का तीन हजार रुपए प्रति मीटर की दर से मुआवजा देने की मांग की। किसानों ने कहा कि हम कंपनी से भीख नहीं मांग रहे हैं, जमीन के बदले मुआवजा हमारा अधिकार है। अगर पावर ग्रिड मुआवजा नहीं देती तो अब हम आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।
किसानों ने प्रस्ताव को बताया गुमराह करने वाला
जिला प्रशासन ने प्रदेश सरकार को नई गाइडलाइन से मुआवजा देने का प्रस्ताव भोपाल भेजा है। इस प्रस्ताव के मुताबिक, 2017 से पहले टावर लाइनों का कोई मुआवजा तय नहीं था।
प्रशासन द्वारा सरकार को दी गई इस जानकारी को गुमराह करने वाला बताते हुए किसानों ने कहा कि जब 2017 से पहले टावर लाइन से पीड़ित किसानों को मुआवजा देने का प्रावधान नहीं था तो उचेहरा के कई किसानों को 15 से 30 लाख रुपए मुआवजा पावर ग्रिड ने किस नियम के तहत दिया।