उसने खुद को बेकसूर साबित करने की न जाने कितनी कोशिश की होगी, लेकिन बालात्कार के झूठे आरोप ने उसे एक ऐसा सदमा दिया कि वह फांसी के फंदे पर झूल गया।
पता नहीं मध्यप्रदेश के इंदौर के इस मामले में 'देर है पर अंधेर नहीं' कि कहावत कहां तक जायज है। जहां लड़की को झूठा बलात्कार का आरोप लगाने के मामले में चार साल की कैद की सजा तो सुनाई गई है। लेकिन अब बाइज्जत बरी करने के लिए कोई नहीं है, पीड़ित बहुत पहले ही इस दुनिया से जा चुका है।
क्या था मामला
इंदौर की चंचल ने रुपकिशोर अग्रवाल पर बलात्कार का आरोप लगाया था। बाद में चंचल ने अपने आरोपों से पलट गई और झूठे बलात्कार के आरोप की बात सामने आई।
पति को कर्ज से बचाना चाहती थी पत्नी
चंचल के पति सुनील ने रुप किशोर अग्रवाल से पैसे लेकर एक गाड़ी खरीदी थी। इसी पैसे की वापसी के लिए रूपकिशोर सुनील के घर पहुंचा। सुनील घर पर नहीं था और सुनील की पत्नी चंचल से रूप किशोर की पैसों को लेकर बहस हो गई। जिसके बाद चंचल ने अपने पति से दुष्कर्म की बात कही और पलासिया थाने में शिकायत दर्ज करा थी।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में चला मामला
मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चला। 28 फरवरी 2013 को रूपकिशोर को कोर्ट में पेश किया गया। 13 मार्च को चंचल दुष्कर्म के आरोपों से मुकर गई। कोर्ट ने चंचल पर झूठा आरोप लगाने और गवाही देने का मामला दर्ज किया लेकिन इसी बीच रूपकिशोर ने 17 मार्च को फांसी लगाकर खुदखुशी कर ली थी।
कोर्ट ने चार साल जेल की सजा सुनाते वक्त कहा- महिला ने कानून के साथ खिलवाड़ किया है। वो सजा की हकदार है।