कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) सागर के तत्कालीन क्षेत्रीय आयुक्त सतीश कुमार को बीड़ी कारोबारी से पांच लाख रुपये की रिश्वत लेने के मामले में दोषी करार देते हुए विशेष अदालत ने पांच वर्ष के सश्रम कारावास और पांच लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
विशेष न्यायाधीश शहाबुद्दीन हाशमी की अदालत ने आरोपी की बीमारी और पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर सजा में राहत देने की मांग खारिज कर दी। अदालत ने टिप्पणी की कि भ्रष्टाचार समाज में प्लेग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की तरह फैल रहा है। ऐसे मामलों में नरमी बरतना समाज के लिए गलत संदेश होगा।
वर्ष 2022 का है मामला
ईओडब्ल्यू ने रंगे हाथों पकड़ा
शिकायत की पुष्टि होने के बाद ईओडब्ल्यू ने योजनाबद्ध कार्रवाई की। शिकायतकर्ता को डिजिटल रिकॉर्डर देकर आरोपी से बातचीत के लिए भेजा गया। रिकॉर्डिंग में 10 लाख रुपये की रिश्वत दो किश्तों (5-5 लाख रुपये) में लेने की बात सामने आई। इसके बाद 5 जून 2022 को ईओडब्ल्यू की टीम ने सनराइज टाउन स्थित शासकीय आवास पर छापा मारकर सतीश कुमार को 5 लाख रुपये की पहली किश्त लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
अदालत में मजबूत साक्ष्य पेश
ये भी पढ़ें- नशे में क्रूर पिता: MP में पहले 12 साल के बेटे को बेरहमी से पीटा, फिर हाथ-पैर बांधकर बाइक से 100 मीटर तक घसीटा
अदालत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने उसकी मां के कैंसर से पीड़ित होने और स्वयं के अस्वस्थ होने का हवाला देकर सजा में रियायत की मांग की। अदालत ने इसे खारिज करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार प्रशासनिक व्यवस्था को खोखला करने वाली गंभीर सामाजिक बुराई है। एक वरिष्ठ अधिकारी का दायित्व कर्मचारियों और श्रमिकों के हितों की रक्षा करना है, न कि उनका शोषण करना। ऐसे मामलों में नरमी बरतने से समाज में गलत संदेश जाएगा।
इस ट्रैप ऑपरेशन का नेतृत्व तत्कालीन निरीक्षक (वर्तमान डीएसपी) उमा नवल आर्य ने किया था। अधिकारियों के अनुसार, बरामद रिश्वत की राशि के लिहाज से यह सागर संभाग की एक बड़ी ट्रैप कार्रवाइयों में से एक मानी जाती है।