सिवनी में आदिवासियों की मॉब लिंचिंग से मध्य प्रदेश में सियासत गरमा गई है। प्रदेश में आदिवासी वोटरों को साधने में जुटी बीजेपी घटना के बाद बैक फुट पर है। वहीं, कांग्रेस मुद्दे से आदिवासी वोटरों का भरोसा जीतने की कोशिश में जुट गई है।
बीजेपी आदिवासियों को साधने के लिए पिछले 8 माह में जबलपुर और भोपाल के जंबूरी मैदान में तीन बड़े कार्यक्रम कर चुकी है। सितंबर 2021 में जबलपुर में गोंडवाना के राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर अमित शाह शामिल हुए। नंवबर 2021 में भोपाल में जनजातीय गौरव दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आए। इसके ठीक 6 माह बाद 22 अप्रैल को राजधानी में अमित शाह ने वनवासी सम्मेलन में भाग लिया। इन कार्यक्रमों के पीछे का बीजेपी का प्लान आदिवासी वोटरों को साधना है। दूसरी तरफ कांग्रेस सत्ता में वापसी करने के बाद आदिवासियों का भरोसा नहीं जीत पाई। अब अगले साल विधानसभा चुनाव होने से फिर राजनीति गरमा गई है।
सिवनी में दो आदिवासी युवकों की मॉब लिंचिंग में मौत के मुद्दे पर कांग्रेस ने तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया है। नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर गोविंद सिंह गुरुवार को सिवनी का दौरा करेंगे। उनके साथ कांग्रेस की तरफ से गठित तीन सदस्यीय जांच दल स्थानीय विधायक नारायण सिंह पट्टा, अशोक मर्सकोले और ओंकार मरकाम भी जाएंगे। यह जांच दल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को अपनी रिपोर्ट देगा।
इस मुद्दे पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि एनसीआरबी के आंकड़े में भी प्रदेश आदिवासी वर्ग के उत्पीड़न की घटनाओं में देश में शीर्ष पर आया है। उन्होंने कहा कि शिवराज जी आपकी सरकार आगामी चुनावों को देखते हुए पिछले कुछ समय से जनजातीय वर्ग को लुभाने के लिए, इनके महापुरुषों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर भव्य आयोजन-इवेंट कर खुद को इस वर्ग का सच्चा हितैषी बताने में लगी हुई है। लेकिन स्थिति इसके बिलकुल उलट है। उन्होंने घटना में दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग की।
कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि सिवनी में बजरंग दल (आरएसएस) के लोगों ने दो आदिवासियों की पीट-पीट कर हत्या कर दी। आरएसएस-भाजपा का संविधान व दलित-आदिवासियों से नफरत का एजेंडा आदिवासियों के प्रति हिंसा को बढ़ावा दे रहा है। हमें एकजुट होकर नफरत से भरे इस एजेंडे को रोकना होगा।
कांग्रेस के राज्यसभा सासंद विवेक तन्खा ने कहा कि सिवनी में 2 आदिवासियों की मृत्यु और एक गंभीर रूप से घायल हो गया। मध्य प्रदेश में आदिवासी महामहिम राज्यपाल हैं। आप के रहते आदिवासियों पर सिवनी या अन्य जिलों में जुल्म कैसे हो रहे हैं और यदि हो रहे हैं तो आप चुप क्यों हैं। हिम्मत कर अपने दायित्व और समाज की रक्षा कीजिए। इतिहास पुरुष बनिये।
वहीं, भाजपा सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि इस तरह के मुद्दे पर राजनीति करना आपत्तिजनक है। कांग्रेस हर विषय का राजनीतिकरण करती है। मुझे नहीं लगता कि ऐसे मुद्दों पर राजनीति की जानी चाहिए।
क्यों महत्वपूर्ण है ST वोटर
मध्य प्रदेश की राजनीति में अनुसूचित जनजाति वोटर की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। इसका अंदाजा पिछले चुनाव से ही लगाया जा सकता है। प्रदेश में एसटी वर्ग के लिए आरक्षित 47 सीट में से 30 सीटें कांग्रेस ने जीती और बीजेपी को सिर्फ 16 सीटें मिली। वहीं, एक सीट निर्दलीय के खाते में गई। इसके चलते ही 15 साल से सत्ता पर काबिज बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। वहीं, प्रदेश की 230 सीटों में से करीब 80 सीटों पर आरक्षित वोटरों का प्रभाव है।
2003 से 2018 तक कांग्रेस को मिली सीटें
प्रदेश में 2003 के विधानसभा चुनाव में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 41 सीटों में से सिर्फ 2 कांग्रेस के खाते में आई। 2008 में आरक्षित 47 सीटों में से कांग्रेस को 17 सीटें मिली, लेकिन सत्ता नहीं मिल पाई। इसके बाद वर्ष 2013 विधानसभा चुनाव में अनुसूचित जनजाति की सीटें कांग्रेस के पास सिर्फ 15 रह गईं। 2018 में कांग्रेस के खाते में 30 सीटें आई थी।
बीजेपी का 51% वोट का लक्ष्य
बीजेपी ने आगामी 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए 51 प्रतिशत वोट पाने का लक्ष्य तय किया है। इससे पहले पिछले चुनाव में बीजेपी को 41.02 प्रतिशत वोट और कांग्रेस को 40.89 प्रतिशत वोट मिले थे। अब बीजेपी ने आगामी चुनाव में अपना 10 प्रतिशत अधिक वोट पाने का लक्ष्य तय किया है।