मध्य प्रदेश के चुनावों में कई बड़े नेता अपनी और अपने रिश्तेदारों की सीटें बचाने में ही उलझ गए हैं। पार्टी के लिए दूसरी सीटों पर काम करना उनके लिए मुश्किल हो गया है।
ज्यादातर सीटों पर संघर्ष इतने कड़े हो गए हैं कि ज्यादातर नेता अपनी या अपने रिश्तेदार की सीट से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। कांग्रेस में केवल दिग्विजय सिंह, सुरेश पचौरी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कमलनाथ, कांतिलाल भूरिया ऐसे नेता हैं जो पूरे प्रदेश में दौरा कर रहे हैं।
वहीं भाजपा में शिवराज सिंह ऐसे नेता हैं जो दो सीटों से खड़े होने के बावजूद पूरे प्रदेश में दौरा कर रहे हैं। सुंदरलाल पटवा, बाबूलाल गौर, कैलाश विजयवर्गीय, कैलाश जोशी और गोपाल भार्गव जैसे नेता या तो अपनी सीट बचाने में लगे हैं या अपने रिश्तेदार को बचाने में लगे हैं।
अरुण यादवः कांग्रेस के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने कसरावद से अपने भाई सचिन यादव को टिकट तो दिला दिया लेकिन अब वह भी प्रदेश में अन्य स्थानों पर दौरा नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें भाई का चुनाव प्रबंधन देखना पड़ रहा है।
कैलाश विजयवर्गीयः भाजपा सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के लिए महू पर कड़ा संघर्ष है। अपने चुनाव का प्रबंधन करने के लिए वह अपना पूरा समय महू (इंदौर) में ही दे रहे हैं।
गोपाल भार्गवः शिवराज सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों में से एक गोपाल भार्गव को रहली सीट पर बृजबिहारी पटेरिया से कड़ी टक्कर मिल रही है। वह प्रदेश में अन्य स्थानों पर प्रचार करने नहीं जा पा रहे हैं।
प्रेमचंद गुड्डूः कांग्रेस सांसद को पार्टी ने मीडिया कमेटी का प्रमुख बनाया था लेकिन अब आलोट से उनका बेटा अजीत बौरासी चुनाव मैदान में है। यदि वे इस बार अजीत बौरासी को चुनाव नहीं जिता पाए तो उनके राजनीतिक भविष्य को भी खासा नुकसान होगा।
सुंदरलाल पटवाः पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के भतीजे सुरेंद्र पटवा को भोजपुर में सुरेश पचौरी का मुकाबला करना पड़ रहा है। सुंदरलाल पटवा का स्वास्थ्य उन्हें वैसे राज्य में अन्य स्थानों पर प्रचार की अनुमति नहीं देता लेकिन वे भतीजे के चुनाव में पूरा दिमाग लगा रहे हैं।
कैलाश जोशीः पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा सांसद कैलाश जोशी अपने बेटे दीपक जोशी की सीट हाटपीपल्या बचाने के लिए जी-तोड़ संघर्ष में लगे हैं। वह राज्य में अन्य स्थानों पर प्रचार करने नहीं जा पा रहे हैं।
जयंत मलैयाः शिवराज सरकार में मंत्री रहे जयंत मलैया और उनकी पत्नी सुधा मलैया को पूरा वक्त अपनी सीट दमोह को बचाने में जा रहा है। उनके प्रतिद्वंद्वी चंद्रभान सिंह लोधी पहले भी मुश्किल से मामूली अंतर से हारे थे।
बाबूलाल गौरः गोविंदपुरा से चुनाव लड़ रहे बाबूलाल गौर की चुनावी स्थिति अच्छी होने के बाद भी वे कोई अवसर नहीं छोड़ना चाहते और अपनी सीट पर पूरा ध्यान लगा रहे हैं। दूसरी सीटों पर समय देना उनके लिए संभव नहीं है।
उमा भारतीः बुंदेलखंड में उमा भारती के भतीजे राहुल सिंह चुनाव मैदान में हैं। उमा भारती दूसरे स्थानों पर भी समय दे रही हैं लेकिन अपने भतीजे को जिताना उनके लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है।