मध्य प्रदेश में खाली विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। कोरोना काल में मतदान कराना चुनाव आयोग के लिए बड़ी चुनौती है, लेकिन राजनीतिक दल प्रचार के दौरान कोरोना प्रोटोकॉल को ताक पर रखकर मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बनाने में लगे हैं। इस बीच चुनाव आयोग ने उपचुनाव में बोगस मतदान रोकने के मकसद से एक खास मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। इसका नाम बूथ ऐप है। चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि सभी मतदान अधिकारी अपने-अपने स्मार्टफोन में यह ऐप इंस्टॉल करें।
कैसे रुकेगा बोगस मतदान?
जानकारी के मुताबिक, चुनाव आयोग इस बार मतदान पर्चियों पर क्यूआर कोड प्रकाशित कर रहा है, जिन्हें स्कैन करते ही मतदान अधिकारी के सामने मतदाता की पूरी डिटेल आ जाएगी। ऐसे में चुनाव आयोग के बूथ ऐप का महत्व काफी ज्यादा बढ़ जाएगा। दरअसल, क्यूआर कोड वाली मतदाता पर्ची को स्कैन बूथ ऐप से ही किया जाएगा।
मतदान अधिकारियों को दिए गए निर्देश
बताया जा रहा है कि सभी मतदान अधिकारियों को बूथ ऐप इंस्टॉल करना अनिवार्य है। दरअसल, इस मोबाइल ऐप के माध्यम से प्रत्येक मत की जानकारी आयोग तक पहुंचेगी। चुनाव आयोग का दावा है कि क्यूआर कोड वाली पर्ची और बूथ ऐप की मदद से बोगस मतदान को भी रोका जा सकेगा।
7 सीटों पर होगा उपचुनाव
बता दें कि मध्य प्रदेश में इंदौर-उज्जैन संभाग की 7 सीटों पर उपचुनाव होने है। देवास जिले की हाटपीपल्या पर 3 नवंबर को मतदान होगा, जिसके लिए प्रथम चरण का प्रशिक्षण हो चुका है। उस दौरान मतदान अधिकारियों को बताया गया था कि हाटपीपल्या सीट पर मतदाताओं को क्यूआर कोड युक्त पर्चियां दी जाएंगी। ऐसे में मतदान अधिकारियों को सामग्री लेने के बाद बूथ ऐप इंस्टॉल करना होगा।
सभी 7 सीटों पर मिलेगी क्यूआर कोड वाली पर्ची
जानकारी के मुताबिक, क्यूआर कोड वाली पर्ची का प्रयोग पहले सिर्फ हाटपीपल्या सीट पर होना था, लेकिन अब कहा जा रहा है कि लेकिन अब कहा जा रहा है कि मालवा-निमाड की सभी 7 सीटों पर क्यूआर कोड वाली पर्चियां बांटी जाएंगी। इससे चुनाव आयोग तक एक-एक मत की जानकारी पहुंचेगी। साथ ही, महिला-पुरुषों की संख्या और मतदान के प्रतिशत की जानकारी भी आसानी से मिलेगी।
बिना नेटवर्क भी काम करेगा ऐप
बताया जा रहा है कि बूथ ऐप पीठासीन अधिकारी और एक अन्य अधिकारी के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ही चलेगा। कहा तो यह भी जा रहा है कि नेटवर्क नहीं होने पर भी यह ऐप काम करता रहेगा। इस दौरान चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि मॉक पोल के पहले बूथ पर तैनात सभी अधिकारियों को अपनी सेल्फी भी बूथ ऐप पर डालनी होगी। माना जा रहा है कि उपचुनाव के बहाने इस मोबाइल ऐप का पायलट परीक्षण हो सकेगा।